
नए वरिष्ठ अधिकारी ने पदभार संभालने के तुरंत बाद अपनी पहली समीक्षा बैठक में ही विभागीय कार्यशैली को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए। बैठक का उद्देश्य विभाग के विभिन्न कार्यों, लंबित परियोजनाओं और प्रशासनिक योजनाओं की समीक्षा करना था, लेकिन बैठक के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया जब एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी और प्रगति रिपोर्ट मांगी गई। बताया जा रहा है कि प्रस्तुत जवाब वरिष्ठ अधिकारी की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं थे। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारी से कई अतिरिक्त सवाल पूछे और कार्यों की तैयारी तथा प्रगति को लेकर असंतोष व्यक्त किया। बैठक में मौजूद अन्य अधिकारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देखा और इसे नए प्रशासनिक नेतृत्व की कार्यशैली का स्पष्ट संकेत माना।
सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारी ने साफ शब्दों में यह संदेश देने की कोशिश की कि भविष्य में किसी भी बैठक में अधूरी जानकारी, बिना तैयारी के प्रस्तुतिकरण या अस्पष्ट जवाब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने विभागीय कार्यों में जवाबदेही, समयबद्धता और तथ्यात्मक जानकारी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति, लंबित मामलों और प्रशासनिक निर्णयों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि चर्चा का केंद्र उस समय आईएएस अधिकारी के जवाब बन गए, जब वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कई बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह नाराजगी किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता और तैयारी को लेकर थी। इस घटना के बाद विभाग के अन्य अधिकारियों में भी यह संदेश गया कि अब प्रत्येक समीक्षा बैठक में पूरी तैयारी के साथ उपस्थित होना आवश्यक होगा।
इस घटनाक्रम के बाद विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई अधिकारियों का मानना है कि नई कार्यशैली से विभाग में अनुशासन, जवाबदेही और कार्यों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक सख्त हो सकती है। आने वाले समय में समीक्षा बैठकों के दौरान प्रत्येक अधिकारी से विस्तृत जानकारी, दस्तावेजों के साथ प्रस्तुतिकरण और समयबद्ध प्रगति रिपोर्ट की अपेक्षा की जाएगी। हालांकि इस पूरे मामले पर किसी भी अधिकारी की ओर से आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन विभाग के भीतर यह चर्चा जरूर है कि अब बैठकों में केवल औपचारिक उपस्थिति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक अधिकारी को अपने कार्यों की पूरी तैयारी और ठोस जानकारी के साथ उपस्थित होना पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस सख्त रुख का उद्देश्य विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है।
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