
इंदौर में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पैक्ड घी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच जांचे गए 96 घी सैंपलों में 28 फेल पाए गए। इनमें 24 सैंपल असुरक्षित और 4 अवमानक मिले। कुछ सैंपलों में सीसे की मात्रा तय सीमा से 5 से 10.5 गुना तक अधिक पाई गई।
96 सैंपलों में 28 जांच में फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, तीन महीने के दौरान इंदौर में कुल 96 घी के नमूनों की जांच की गई। इनमें 28 सैंपल खाद्य मानकों पर खरे नहीं उतरे। 24 सैंपल असुरक्षित और चार अवमानक घोषित किए गए। जांच में सीसे की मौजूदगी भी सामने आई, जिससे घी की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
17 हजार लीटर घी से जुड़ा मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, असुरक्षित पाए गए 24 सैंपलों से करीब 17 हजार लीटर घी का स्टॉक जुड़ा है। कार्रवाई से पहले इसका लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 2,550 से 3,400 लीटर घी बाजार तक पहुंच चुका था। विभाग ने इंदौर के लसूड़िया, देवास नाका, बांगड़दा, सियागंज, पालदा, लोहामंडी समेत कई क्षेत्रों में जांच और कार्रवाई की।
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घी में सीसे की मात्रा कितनी मिली?
घी में सीसे की स्वीकार्य सीमा 0.02 mg/kg बताई गई है। जांचे गए 10 सैंपलों में सीसे की मात्रा 0.10 से 0.21 mg/kg तक मिली। यानी कुछ नमूनों में यह निर्धारित सीमा से 5 से 10.5 गुना तक ज्यादा रही। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह गंभीर चिंता का विषय है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरा
सीसे के लंबे समय तक संपर्क का असर स्वास्थ्य पर गंभीर हो सकता है। बच्चों में सीखने और एकाग्रता की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। वयस्कों में लगातार संपर्क से गुर्दे और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान सीसे का संपर्क भ्रूण के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।
इंदौर में घी के सैंपलों की जांच ने खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। 96 में से 28 सैंपलों का फेल होना और कुछ नमूनों में तय सीमा से कई गुना अधिक सीसा मिलना गंभीर मामला है। उपभोक्ताओं को घी खरीदते समय पैकेजिंग, लाइसेंस और गुणवत्ता संबंधी जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
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