
सार
किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों के लिए कम ब्याज पर कर्ज उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत पात्र किसान 3 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं। सामान्य ब्याज दर 7 प्रतिशत बताई गई है, जबकि समय पर भुगतान करने पर ब्याज में 3 प्रतिशत की सब्सिडी मिलने से प्रभावी दर 4 प्रतिशत तक हो सकती है।
विस्तार
किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा है। इसके जरिए किसान बीज, खाद, कीटनाशक और खेती में होने वाले दूसरे खर्चों को पूरा करने के लिए वित्तीय मदद ले सकते हैं। योजना का लाभ देश के किसान उठा सकते हैं और पीएम किसान के लाभार्थी भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
KCC के तहत किसान 3 लाख रुपये तक का लोन 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ले सकते हैं। समय पर ऋण चुकाने पर 3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता है। इससे प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत तक रह सकती है।
KCC के लिए आवेदक के पास खेती की जमीन होना जरूरी बताया गया है, लेकिन जमीन की न्यूनतम या अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। अपनी जमीन के अलावा पट्टे या किराए की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी आवेदन कर सकते हैं।
KCC का लाभ लेने के लिए आवेदक का किसान होना जरूरी है। इसके अलावा पट्टे या किराए की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी पात्र हो सकते हैं। आवेदक की उम्र 18 से 75 वर्ष के बीच होनी चाहिए। 60 वर्ष से अधिक उम्र के आवेदक के लिए सह-आवेदक की जरूरत होती है।
KCC के लिए आवेदन करते समय किसान से कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे जाते हैं। इनमें-
- जमीन के दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी या जमाबंदी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- एड्रेस प्रूफ
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- मोबाइल नंबर
शामिल हैं।
किसान KCC के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर KCC आवेदन का विकल्प देखा जा सकता है। वहीं ऑफलाइन आवेदन के लिए किसान नजदीकी बैंक शाखा में संपर्क कर सकते हैं।
KCC का उद्देश्य किसानों को खेती के दौरान होने वाले जरूरी खर्चों के लिए आसानी से ऋण उपलब्ध कराना है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक और दूसरे कृषि निवेश के लिए मिलने वाली राशि खेती की लागत को संभालने में मदद कर सकती है। खबर के मुताबिक, आवेदन के बाद 15 दिन के भीतर किसान को KCC मिलने की बात कही गई है।
KCC का ऋण समय पर चुकाना जरूरी है। भुगतान नहीं होने पर बैंक की ओर से नोटिस दिया जा सकता है। 90 दिनों तक भुगतान नहीं होने पर खाते को NPA घोषित किया जा सकता है और इसके बाद रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होती है। नियमों के तहत बकाया ऋण की वसूली के लिए जमीन जब्त और नीलाम करने का प्रावधान भी हो सकता है।
KCC धारक की मृत्यु होने पर कर्ज अपने आप माफ नहीं होता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऋण की जिम्मेदारी उत्तराधिकारी की संपत्ति पर आ सकती है। हालांकि, यदि KCC धारक ने योजना के तहत बीमा लिया है तो बीमा क्लेम से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल ऋण चुकाने में किया जा सकता है।
- KCC-Loan-3-Lakh-Interest-Eligibility-Documents-Application-Process








