
शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत की उम्मीद एक बार फिर बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और भारतीय शेयर बाजार में दबाव के बीच कैपिटल गेन्स टैक्स को कम करने या खत्म करने की मांग तेज हो रही है। इस मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी निवेशकों की चिंताओं को स्वीकार किया है। 2 नवंबर 2026 को मुंबई में आयोजित एक बिजनेस कार्यक्रम के दौरान उनसे LTCG टैक्स को लेकर सवाल पूछा गया। वित्त मंत्री ने टैक्स में कटौती का सीधा आश्वासन नहीं दिया, लेकिन कहा कि बाजार से जुड़े लोग अपनी चिंताएं खुलकर सामने रख रहे हैं और वह इन सभी बातों पर विचार करेंगी। उनके इस बयान के बाद निवेशकों के बीच टैक्स राहत की उम्मीद बढ़ गई है।
मौजूदा नियमों के अनुसार, लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से अधिक समय तक निवेश रखने के बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लगता है। वहीं 12 महीने या उससे कम अवधि में शेयर बेचने पर होने वाले मुनाफे पर 20 प्रतिशत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लागू होता है। फिलहाल LTCG में सालाना 1.25 लाख रुपये तक की छूट उपलब्ध है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से टैक्स में राहत की मांग की जा रही है, क्योंकि उनका मानना है कि टैक्स का बोझ कम होने से भारतीय शेयर बाजार में निवेश अधिक आकर्षक हो सकता है। वित्त मंत्री ने इस विषय पर घरेलू निवेशकों के हितों को भी ध्यान में रखने की बात कही है।
इस बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने भी सरकार को LTCG टैक्स में बदलाव के सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी ने विदेशी इक्विटी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में निवेश स्थानांतरित करने पर कुछ शर्तों के साथ टैक्स छूट देने की सिफारिश की है। हालांकि, ये केवल सुझाव हैं और सरकार पर इन्हें लागू करने की बाध्यता नहीं है। बजट से पहले इन प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना के बीच निवेशकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। अभी तक LTCG टैक्स में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और मौजूदा टैक्स नियम ही लागू हैं।






