
सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व Aide-de-Camp (ADC) रहे Major Rishabh Sambyal ने राष्ट्रपति के साथ काम करने वाले ADC की जिम्मेदारियों और कठिन ट्रेनिंग से जुड़े अनुभव साझा किए हैं। ADC का पद सिर्फ प्रोटोकॉल निभाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें हर समय सतर्कता, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता और राष्ट्रपति के साथ नजदीकी समन्वय जरूरी होता है। इसी सैन्य संस्कृति को समझने के लिए ‘Naam, Namak, Nishan’ की अवधारणा भी महत्वपूर्ण है, जो सैनिक के सम्मान, वफादारी और उस ध्वज/पहचान के प्रति कर्तव्य को दर्शाती है।
विस्तार
Major Rishabh Sambyal भारतीय सेना के अधिकारी रहे हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के Aide-de-Camp यानी ADC के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। राष्ट्रपति के ADC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों, यात्राओं और विभिन्न औपचारिक अवसरों में उनके साथ रहते हैं और सैन्य तथा प्रोटोकॉल से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालते हैं। राष्ट्रपति के साथ लगातार मौजूद रहने के कारण ADC को बेहद अनुशासित, सतर्क और परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने में सक्षम होना पड़ता है।
ADC की ट्रेनिंग में केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि ड्रिल, प्रोटोकॉल, संचार, समय प्रबंधन, सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं और वीआईपी मूवमेंट से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद की सुरक्षा और गरिमा से जुड़े काम में छोटी-सी चूक की भी गुंजाइश नहीं होती। इसलिए ADC को बदलती परिस्थितियों को तेजी से समझने और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने की क्षमता विकसित करनी होती है।
इसी सैन्य सोच को समझने के लिए ‘Naam, Namak, Nishan’ तीन बेहद महत्वपूर्ण शब्द हैं। सैन्य परंपरा में ‘Naam’ का अर्थ केवल किसी सैनिक का नाम नहीं, बल्कि उसकी और उसकी रेजिमेंट की प्रतिष्ठा और सम्मान से है। सैनिक के लिए अपने देश और अपनी पलटन का नाम ऊंचा रखना उसके कर्तव्य का हिस्सा माना जाता है।
‘Namak’ वफादारी का प्रतीक है। भारतीय सैन्य संस्कृति में ‘जिसका नमक खाया, उसके प्रति वफादार रहना’ एक गहरे भाव के रूप में देखा जाता है। इसका मतलब अपनी यूनिट, साथियों, सेना और अंततः देश के प्रति पूरी निष्ठा रखना है। ‘Namak’ सैनिकों के बीच उस भरोसे और भाईचारे को भी दर्शाता है, जिसमें वे एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
वहीं ‘Nishan’ उस ध्वज, रेजिमेंटल कलर या पहचान का प्रतीक है जिसके सम्मान की रक्षा करना सैनिक अपना कर्तव्य मानता है। पुराने युद्धों में रेजिमेंट का झंडा सैनिकों के लिए एकजुट होने का केंद्र होता था। इसलिए उसे खोना केवल एक सैन्य नुकसान नहीं, बल्कि पूरी रेजिमेंट के सम्मान से जुड़ा विषय माना जाता था। आज भी रेजिमेंटल कलर और राष्ट्रीय ध्वज सैनिक के लिए गौरव, परंपरा और बलिदान का प्रतीक हैं।
सरल शब्दों में कहें तो Naam यानी सम्मान, Namak यानी वफादारी और Nishan यानी उस सम्मान और पहचान की रक्षा का संकल्प। यही सोच सैनिक जीवन में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर यूनिट, सेवा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना को मजबूत करती है।
‘Naam, Namak, Nishan’ की यही अवधारणा 2024 में आई वेब सीरीज के नाम का भी आधार बनी थी, जिसकी कहानी चेन्नई स्थित Officers Training Academy में युवा कैडेट्स की ट्रेनिंग, दोस्ती, भाईचारे और देशसेवा की भावना के इर्द-गिर्द घूमती है।
Major Rishabh Sambyal के अनुभवों के जरिए राष्ट्रपति के ADC की भूमिका को समझने पर यह भी स्पष्ट होता है कि वर्दी में जिम्मेदारी केवल हथियार या पद तक सीमित नहीं होती। इसके पीछे वर्षों की ट्रेनिंग, अनुशासन, टीम के प्रति भरोसा और देश की प्रतिष्ठा को सर्वोपरि रखने की मानसिकता काम करती है।
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