
ब्रांडवाणी डेस्क: मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव के बीच ईरान की तरफ से सोशल मीडिया पर सामने आ रहे ये AI वीडियो और पोस्ट सिर्फ “मजाक” या “क्रिएटिव कंटेंट” नहीं माने जा रहे, बल्कि इन्हें एक तरह की मनोवैज्ञानिक और प्रचार युद्ध रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. दक्षिण अफ्रीका में ईरान के दूतावास द्वारा शेयर किया गया अनार के जूस वाला वीडियो ऊपर से हल्का-फुल्का दिखता है, लेकिन उसके पीछे दिया गया संदेश तेल अवीव पर ज्यादा सटीक हमला करने की बात सीधे तौर पर इज़राइल को निशाना बनाता है और यही वजह है कि इसने विवाद खड़ा कर दिया.
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इससे पहले जारी “One Vengeance For All” वीडियो भी इसी तरह का एक प्रतीकात्मक संदेश देता है, जिसमें अमेरिका को वैश्विक संघर्षों के केंद्र में दिखाने की कोशिश की गई. इतिहास की कई घटनाओं – जैसे हिरोशिमा, वियतनाम और मध्य पूर्व के हालिया युद्ध को जोड़कर एक ऐसा नैरेटिव बनाया गया है जिसमें अमेरिका को लगातार हिंसा और अस्थिरता के स्रोत के रूप में पेश किया गया है. वीडियो के आखिरी हिस्से में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी पर मिसाइल गिरने का दृश्य और उसे एक अलग, डरावने प्रतीक में बदलना इस बात का संकेत है कि यह सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि एक मजबूत वैचारिक संदेश भी है.
खास बात यह है कि यह सब उस समय हो रहा है जब Donald Trump शांति वार्ता की बात कर रहे हैं और हमलों पर अस्थायी रोक लगाने का ऐलान कर चुके हैं. यानी एक तरफ बातचीत और समझौते की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ इस तरह के डिजिटल और प्रतीकात्मक हमले भी जारी हैं. यही विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना देता है.
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