ब्रांडवाणी स्पेशल रिपोर्ट: बड़वानी में कुपोषण पर सिस्टम फेल, 2900 अति कुपोषित बच्चों के बावजूद NRC केंद्रों के आधे बेड खाली

बड़वानी स्पेशल: जिले में 2900 से अधिक बच्चे अति कुपोषण की श्रेणी में हैं, लेकिन उन्हें उपचार देने वाले पोषण पुनर्वास केंद्रों में 50 प्रतिशत से अधिक बेड खाली पड़े हैं। जिला अस्पताल सहित 6 केंद्रों में कुल 70 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें केवल 33 बच्चों का ही इलाज चल रहा है, जबकि 37 बेड खाली हैं।

क्या है पूरा मामला?
जिले में 2900 से अधिक बच्चे अति कुपोषित हैं। इसके बावजूद जिला अस्पताल सहित 6 NRC केंद्रों में उपलब्ध 70 बेड में से केवल 33 पर ही बच्चे भर्ती हैं, जबकि 37 बेड खाली हैं। यह स्थिति जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अभियान खत्म, सिस्टम भी बंद? – स्थानीय स्तर पर सामने आया है कि जब शासन द्वारा “पोषण माह” जैसे अभियान चलाए जाते हैं, तब विभाग सक्रिय नजर आता है और केंद्रों में बच्चों की संख्या बढ़ जाती है। लेकिन अभियान समाप्त होते ही भर्ती की रफ्तार थम जाती है।

किन क्षेत्रों में सबसे खराब हालात?

  • राजपुर: 10 बेड में सिर्फ 1 बच्चा
  • सेंधवा: 10 में से 4 भर्ती
  • निवाली: स्थिति संतोषजनक नहीं
  • पाटी-पानसेमल: अपेक्षाकृत बेहतर

रेफरल सिस्टम पर सवाल- NRC में तैनात स्टाफ का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों को पर्याप्त संख्या में रेफर नहीं किया जा रहा है। इससे जरूरतमंद बच्चे केंद्र तक पहुंच ही नहीं पा रहे।

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बजट और सुविधाओं की हकीकत- केंद्रों को मिलने वाला बजट बेड की संख्या के आधार पर तय होता है, लेकिन जब भर्ती कम होती है तो सुविधाओं में भी कटौती होने लगती है। कई जगह तय पोषण मीनू का पालन नहीं हो रहा, जिससे बच्चों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।

आंकड़ों में स्थिति:

  • कुल केंद्र: 6
  • कुल बेड: 70
  • भर्ती बच्चे: 33
  • खाली बेड: 37

क्या कहा रहेें है जिम्मेदार? – जिला कार्यक्रम अधिकारी रतनसिंह गुंडिया के अनुसार, कुपोषण दूर करना स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 1800 से 1900 बच्चों को स्वस्थ किया गया है और संबंधित अधिकारियों को अधिक से अधिक बच्चों की पहचान कर NRC में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

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