
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने कथित अवैध गतिविधियों में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे 20 फरवरी तक शपथपत्र (अफिडेविट) के रूप में पूरी जानकारी पेश करें।
जनहित याचिका पर सुनवाई
यह निर्देश अदालत ने एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस नामक संगठन की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में दावा किया गया कि कुछ पुलिसकर्मी और अधिकारी अवैध गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
खबर और स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि:
- यह याचिका 30 नवंबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है
- रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों की संदिग्ध गतिविधियों का उल्लेख था
- मामले से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो और ऑडियो भी अदालत में प्रस्तुत किए गए
बताया गया कि संबंधित डिजिटल साक्ष्य पेन ड्राइव के माध्यम से अदालत को सौंपे गए हैं।
अदालत का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए:
- गृह विभाग से अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा
- जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा
- निर्धारित समय सीमा में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया
आगे क्या होगा?
अब राज्य सरकार को 20 फरवरी तक:
- कार्रवाई की वर्तमान स्थिति
- जांच की प्रगति
- संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उठाए गए कदम
का ब्यौरा अदालत में पेश करना होगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट आगे की दिशा तय करेगा।
क्यों अहम है मामला?
कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह की सुनवाई:
- पुलिस प्रशासन में जवाबदेही बढ़ा सकती है
- जांच प्रक्रिया को तेज कर सकती है
- सिस्टम में पारदर्शिता लाने में मददगार साबित हो सकती है
यह मामला राज्य में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दे सकता है।









