पिछोर के चंदूपहाड़ी में राशन को लेकर बवाल, 4 महीने से गरीबों को अनाज नहीं मिलने का आरोप

पिछोर/ कुलदीप शर्मा: सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को हर महीने सस्ता और मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, लेकिन शिवपुरी जिले के पिछोर तहसील के चंदूपहाड़ी गांव से इस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां शासकीय उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन पर ग्रामीणों ने पिछले करीब चार महीने से राशन नहीं देने और ई-पॉश मशीन में कथित हेराफेरी कर अनाज वितरण दिखाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिकायत से नाराज करीब 40 से 50 महिला-पुरुष गुरुवार को एकजुट होकर पिछोर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने यहां जमकर नारेबाजी की और एसडीएम को लिखित ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच, दोषी के खिलाफ कार्रवाई और उनका बकाया राशन दिलाने की मांग की।

मशीन खराब और सर्वर डाउन बताकर लौटाने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि जब वे उचित मूल्य की दुकान पर राशन लेने जाते हैं तो कभी ई-पॉश मशीन खराब होने, तो कभी सर्वर डाउन होने की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। आरोप है कि कई बार ग्रामीणों से मशीन पर अंगूठा भी लगवा लिया जाता है, लेकिन इसके बाद उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया जाता।

ग्रामीणों के मुताबिक बाद में जब वे अपनी पावती या ऑनलाइन रिकॉर्ड की जानकारी देखते हैं तो उसमें राशन का वितरण दर्ज दिखाई देता है। इससे ग्रामीणों को आशंका है कि उनके नाम पर रिकॉर्ड में खाद्यान्न बांट दिया गया, जबकि उन्हें वास्तविक रूप से राशन मिला ही नहीं।

फर्जी अंगूठे के जरिए राशन हड़पने का आरोप

ग्रामीणों ने सेल्समैन पर ई-पॉश मशीन के माध्यम से कथित तौर पर फर्जी तरीके से राशन वितरण दर्ज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें यह कहकर अंगूठा लगवा लिया जाता है कि इस महीने राशन नहीं आया है या अगले महीने राशन दिया जाएगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि अंगूठा लगने के बाद सिस्टम में उनके हिस्से का खाद्यान्न वितरित होना दिखा दिया जाता है। इसके चलते पात्र परिवार अपने ही हिस्से के राशन से वंचित रह जाते हैं।

हालांकि, ये सभी आरोप ग्रामीणों की शिकायत पर आधारित हैं। मामले में वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

मजदूरी करने वाले परिवारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के ज्यादातर गरीब परिवार मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं। ऐसे में सरकारी राशन नहीं मिलने से उनके सामने घर का खर्च चलाने की मुश्किल बढ़ गई है।

ग्रामीण रामस्वरूप आदिवासी, हल्की बाई और रामकली सहित अन्य लोगों ने बताया कि सरकार की योजना के तहत प्रति व्यक्ति मिलने वाले खाद्यान्न पर गरीब परिवार काफी हद तक निर्भर हैं। चार महीने से राशन नहीं मिलने के कारण उन्हें बाजार से महंगे दाम पर अनाज खरीदना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी राशन दुकान से समय पर अनाज मिलता तो उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

40-50 ग्रामीण पहुंचे SDM कार्यालय

मामले को लेकर गुरुवार दोपहर बड़ी संख्या में ग्रामीण पिछोर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी और मांग की कि पिछले चार महीनों के राशन वितरण रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उन्हें बकाया राशन नहीं दिया गया और शिकायत के आधार पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे।

जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन

ग्रामीणों की शिकायत को पिछोर एसडीएम ने गंभीरता से लिया है। एसडीएम ने खाद्य विभाग के अधिकारी को मौके पर भेजकर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान राशन दुकान के रिकॉर्ड, ई-पॉश मशीन में दर्ज वितरण, पात्र हितग्राहियों की जानकारी और वास्तविक खाद्यान्न वितरण की स्थिति की जांच की जाएगी। यदि जांच में सेल्समैन के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम ने यह भी आश्वासन दिया है कि दोषी पाए जाने पर सेल्समैन का लाइसेंस निरस्त करने के साथ एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीण वापस लौट गए हैं। अब पूरे मामले में खाद्य विभाग की जांच महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि उनके हिस्से का राशन वास्तव में रिकॉर्ड में बांटा गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कर उन्हें उनका बकाया खाद्यान्न दिलाया जाएगा।

 
 
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  • Manisha Gupta

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