
ताशकंद: उज्बेकिस्तान की दो-दिवसीय राजकीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ताशकंद स्थित शास्त्री स्मारक पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि चढ़ाई। इसके साथ ही, पीएम मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने राष्ट्रपति भवन के बगीचे में संयुक्त रूप से एक पौधा भी लगाया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, शास्त्री जी का कालजयी नारा ‘जय जवान, जय किसान’ हर पीढ़ी को प्रेरित करता है और उनका जीवन सादगी, साहस व देश के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में निधन हो गया था, जब वे 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने वहां पहुंचे थे।
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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव द्वारा किया गया पौधरोपण भारत की “एक पेड़ मां के नाम” पहल और उज्बेकिस्तान की “यशिल माकोन” हरित मुहिम का हिस्सा था। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया कि यह संयुक्त कदम एक हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य को बढ़ावा देने के प्रति दोनों देशों की साझी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कुक्सारोय प्रेसिडेंशियल पैलेस में आयोजित प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इस वार्ता में व्यापार और निवेश, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI), रक्षा व सुरक्षा, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, अंतरिक्ष और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर गहन चर्चा हुई।
दोनों देश वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर सहमत हुए हैं, जिसके लिए एक द्विपक्षीय व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इससे पूर्व, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ओली दराजाली दोस्तलिक’ से भी अलंकृत किया।
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