
ब्रांणवाणी स्पेशल रिपोर्ट: नेपाल और तिब्बत की सीमा से सटे हिमालयी क्षेत्रों में आई हालिया प्राकृतिक आपदा ने व्यापक तबाही मचाई है। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर टूटने से बर्फ, चट्टानों और मलबे का भारी सैलाब नेपाल की ल्हेंदे खोला, भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में आ गया। इस सैलाब ने नेपाल के सीमावर्ती गांवों, पुलों और सड़कों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोग लापता हो गए। हालांकि, इस त्रासदी के बीच अब आपदा से जुड़ी जानकारियों और स्वतंत्र तस्वीरों पर चीनी प्रशासन के कथित नियंत्रण को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है।
आपदा के तुरंत बाद तिब्बत के स्थानीय निवासियों ने नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट और उसके आसपास हुई तबाही के दृश्य चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए थे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई वीडियो जल्द ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटा दिए गए। नेपाल में आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, जबकि चीनी सरकारी मीडिया ने शुरुआत में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में केवल पांच मौतों की बात कही थी। हालांकि बाद में चीनी प्रशासन ने ग्यिरोंग क्षेत्र में सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात स्वीकार की। इसके अलावा, चीन की सरकारी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ और पीपुल्स डेली का पूरा ध्यान सेना, आपातकालीन सेवाओं और हेलीकॉप्टरों द्वारा चलाए जा रहे राहत व बचाव कार्यों और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देशों पर केंद्रित रहा, जबकि स्थानीय स्तर पर बने स्वतंत्र वीडियो कथित तौर पर गायब कर दिए गए।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस सीमावर्ती क्षेत्र में कम से कम 320 भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं, जबकि करीब 400 अन्य लोग चीन की तरफ फंसे हुए हैं। आदिल ब्रार और ब्रह्मा चेलानी जैसे भू-राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि नेपाल की तरफ से आम लोगों द्वारा साझा की गई तस्वीरें लगातार ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जबकि चीन की तरफ से ग्यिरोंग पोर्ट की तबाही दिखाने वाले वीडियो हटाए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर सही जानकारी न मिलने से मानवीय सहायता अभियानों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, ‘इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत’ के कार्यकारी निदेशक रयान फियोरेसी ने कहा कि तिब्बत में सूचना का प्रवाह चीनी सरकार के कड़े नियंत्रण में है। यदि स्थानीय लोग डर के कारण जानकारी साझा नहीं कर पाएंगे, तो प्रभावित परिवारों और बचावकर्मियों तक महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचने में देरी हो सकती है।
दूसरी ओर, चीनी अधिकारियों और नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने उन दावों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि चीन की तरफ बना कोई ढांचा या प्राकृतिक बांध टूटने से नीचे तबाही हुई। चीन ने समय पर चेतावनी न देने और संरचनात्मक विफलता के आरोपों को ‘फेक न्यूज’ करार देते हुए कहा कि वह नेपाल के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों में पूरा सहयोग कर रहा है। इसके साथ ही, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न थिएटर कमांड की टीमों, आपातकालीन कर्मियों और हेलीकॉप्टरों को ग्यिरोंग क्षेत्र में राहत अभियान के समन्वय के लिए तैनात किया गया है। फिर भी, चीन के कब्जे वाले तिब्बत में विदेशी पत्रकारों की सीमित पहुंच के कारण, स्वतंत्र दृश्यों का न मिल पाना वैश्विक समुदाय के सामने एक अधूरी तस्वीर पेश करता है।
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