
लेन-देन की शिकायतों के बाद एक बड़े और मलाईदार जिले की कलेक्टरी से हटाए गए प्रमोटी आईएएस को मंत्रालय में लूप लाइन माने जाने वाले विभाग में भेज दिया गया था। लेकिन साहब ने इसे अपनी मंजिल नहीं माना। कुछ ही समय बाद फिर से फील्ड में वापसी की जुगाड़ शुरू हो गई। साहब की नजर राजधानी से सटे एक जिले पर थी।
उम्मीद थी कि अगली तबादला सूची में नाम आएगा और सरकार उन्हें कलेक्टर बनाकर फील्ड में भेज देगी। साहब को अपनी पोस्टिंग को लेकर पूरा भरोसा था, लेकिन तबादला सूची ने अरमानों पर पानी फेर दिया। नाम तो सूची में आया, लेकिन कलेक्टर की कुर्सी नहीं मिली। सरकार ने साहब को एक छोटे से संभाग में एडिशनल कमिश्नर बनाकर भेज दिया।
साहब को अपनी पोस्टिंग को लेकर पूरा भरोसा था, लेकिन तबादला सूची ने अरमानों पर पानी फेर दिया। नाम तो सूची में आया, लेकिन कलेक्टर की कुर्सी हाथ नहीं लगी। सरकार ने साहब को एक छोटे से संभाग में एडिशनल कमिश्नर बनाकर भेज दिया। पानी फिर से साहब के अरमानों पर गया। हालांकि साहब को कम आंकना भी ठीक नहीं। उनकी पहचान ऐसे अफसर की बताई जाती है, जो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लिए रास्ता निकालना जानते हैं। महकमे में तो साहब को लेकर ये कहावत तक चलती है कि वे रेत से भी तेल निकालने का हुनर रखते हैं।
- promotee-ias-ke-armaanon-par-phira-paani






