
ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों एक महिला आईएएस कलेक्टर की पावर को लेकर खूब बातें हो रही हैं। मैडम एक बड़े जिले की कमान संभाल रही हैं और उनके जिले में करीब 40 लोगों की मौत के बाद भी उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि अफसरों के बीच मैडम की मजबूत पकड़ को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। यह पहला मौका भी नहीं है। इससे पहले जब मैडम प्रदेश की आर्थिक राजधानी में आयुक्त के पद पर थीं, तब भी उनके कार्यकाल के दौरान करीब 40 मौतों का मामला सामने आया था। उस समय भी मैडम को पद से नहीं हटाया गया था।
दिलचस्प बात यह है कि इसी सरकार के कार्यकाल में एक बस हादसे में करीब एक दर्जन लोगों की मौत के बाद आधा दर्जन आईएएस-आईपीएस अधिकारियों को हटा दिया गया था। इनमें कलेक्टर भी शामिल थे, जबकि हादसे में कलेक्टर की सीधी भूमिका होने को लेकर भी सवाल उठे थे। अब ब्यूरोक्रेसी में सवाल यही है कि जब सरकार एक ही है, प्रदेश एक ही है और हादसों के बाद जवाबदेही तय करने का सवाल भी एक जैसा है, तो कार्रवाई के पैमाने अलग-अलग क्यों नजर आते हैं?
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