
रीवा/ अरविंद तिवारी: रीवा जिले की जनपद पंचायत त्योंथर की ग्राम पंचायत घुमा में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों को लेकर मामला गरमा गया है। शिकायतकर्ता युवक मयंक पांडेय ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर रीवा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। शिकायत के साथ ही युवक ने प्रशासन को 15 दिन का समय देते हुए मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि तय अवधि में जांच नहीं हुई तो वह मोबाइल टावर पर चढ़कर आमरण अनशन करेगा।
सरपंच-सचिव और रोजगार सहायक पर लगाए आरोप
शिकायतकर्ता मयंक पांडेय ने ग्राम पंचायत घुमा के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर मिलीभगत कर सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग और विकास कार्यों में अनियमितता किए जाने के आरोप लगाए हैं।
युवक का दावा है कि पंचायत में जिन विकास कार्यों को रिकॉर्ड और दस्तावेजों में दर्शाया गया है, उनकी जमीनी स्थिति अलग है। उनका आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूरे दिखाई देने के बावजूद ग्रामीणों को कई जगह मूलभूत सुविधाओं की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
मयंक पांडेय ने रीवा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायत में हुए कथित विकास कार्यों और सरकारी राशि के उपयोग की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब मामला प्रशासन के संज्ञान में आ गया है। संबंधित अधिकारियों के स्तर से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई है।
15 दिन का अल्टीमेटम, टावर पर चढ़ने की चेतावनी
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू शिकायतकर्ता की चेतावनी है। मयंक पांडेय ने कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो वह मोबाइल टावर पर चढ़कर आमरण अनशन करेंगे।
इस चेतावनी के बाद प्रशासन के सामने शिकायत की जांच के साथ युवक की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसी स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन को समय रहते उचित कदम उठाने की जरूरत होगी।
अब जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत घुमा में लगाए गए आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
सवाल यह भी है कि क्या 15 दिन की समयसीमा पूरी होने से पहले प्रशासन जांच को आगे बढ़ाकर शिकायतकर्ता को संतुष्ट कर पाएगा? क्या पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी?
फिलहाल मामला प्रशासनिक जांच के चरण में है और अब सभी की नजरें रीवा जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
- rewa-ghuma-panchayat-corruption-allegations-youth-warning








