
मैहर/ देवेश शर्मा: सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत के मामले ने मध्यप्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश में अवैध शराब के बढ़ते कारोबार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि सरकारी नाकामी का नतीजा है।
‘प्रदेश के गांव-गांव में चल रहा अवैध शराब का कारोबार’
नारायण त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से बेलगाम है। उन्होंने कहा कि वह लगातार सरकार को इस समस्या को लेकर आगाह करते रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की कथित निष्क्रियता के कारण अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है।
पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश स्तर पर अवैध शराब के खिलाफ ठोस नीति और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। केवल दिखावटी या खानापूर्ति की कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी और इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
जहरीली शराब से मौतों के आंकड़े गिनाए
त्रिपाठी ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दिए गए एक पुराने जवाब का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से 1,214 मौतें दर्ज की गई थीं।
उन्होंने दावा किया कि 2020 के बाद भी उज्जैन, मुरैना, रतलाम, सागर, छतरपुर, भिंड, इंदौर, जबलपुर और खरगोन समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जहरीली शराब से मौतें होती रही हैं। उनके अनुसार इन घटनाओं में दर्ज 76 मौतों को जोड़ने पर आंकड़ा 1,290 तक पहुंचता है।
सागर की ताजा घटना ने बढ़ाई चिंता
पूर्व विधायक के मुताबिक सागर जिले में हुई ताजा घटना में जहरीली शराब के सेवन से 22 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने दावा किया कि जांच में शराब में मेथेनॉल की पुष्टि हुई है और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हैं।
उन्होंने कहा कि इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की शराब नीति और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौतों और जांच से जुड़े आंकड़ों की आधिकारिक स्थिति संबंधित प्रशासनिक रिपोर्ट से स्पष्ट होगी।
25 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग
नारायण त्रिपाठी ने सरकार से प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और जहरीली शराब से प्रभावित लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग की।
उन्होंने अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के साथ-साथ जिम्मेदार आबकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
‘एक भी माफिया को सजा नहीं हुई’
त्रिपाठी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहरीली शराब से मौत के मामलों में सख्त कानून बनाए जाने के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून इतना सख्त है, तो अब तक कितने शराब माफिया को सजा मिली?
उन्होंने कहा कि किसी परिवार में मां अपने बेटे को, पत्नी अपने पति को और बच्चों ने अपने पिता को खोया है। उन्होंने कहा कि इस नुकसान की भरपाई किसी भी मुआवजे से नहीं की जा सकती।
पूर्व विधायक ने सरकार से अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
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