
धर्मेंद्र सिंह लोधी | टीकमगढ़, 5 अक्टूबर 2026: जिले के बल्देवगढ़ विकासखंड के ग्राम चंदेरी की रहने वाली सीता रजक ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह अपनाई। समूह से मिले सहयोग और ऋण राशि का उपयोग कर उन्होंने गांव में जनरल स्टोर शुरू किया। आज इस व्यवसाय से उन्हें करीब 10 हजार 500 रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। कृषि कार्य से मिलने वाली करीब 9 हजार रुपये की अतिरिक्त आय के साथ परिवार की मासिक आमदनी लगभग 19 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
स्व-सहायता समूह से मिली स्वरोजगार की राह
सीता रजक राधिका महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बैठकों में शामिल होने के साथ उन्हें प्रशिक्षण और मिशनकर्मियों का मार्गदर्शन मिला। इसके बाद उन्होंने स्वरोजगार शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
समूह से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग करते हुए सीता ने अपने गांव में जनरल स्टोर की शुरुआत की। गांव में ही दुकान शुरू होने से उन्हें रोजगार का साधन मिला और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ।
सीता के मुताबिक, पहले सीमित आय के कारण परिवार के खर्च को संभालना चुनौतीपूर्ण था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय करीब 1,200 रुपये थी। स्वरोजगार शुरू करने के बाद उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है।
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खेती के साथ बढ़ी परिवार की मासिक आय
जनरल स्टोर से सीता रजक को वर्तमान में करीब 10,500 रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है। इसके अलावा कृषि कार्य से लगभग 9 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। दोनों आय को मिलाकर परिवार की मासिक आमदनी करीब 19 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
सीता की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में स्व-सहायता समूहों की भूमिका को भी सामने लाती है। समूह के माध्यम से मिलने वाला प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग महिलाओं को अपनी क्षमता के अनुसार छोटे व्यवसाय शुरू करने का अवसर दे रहा है।
सीता रजक का अनुभव बताता है कि स्वरोजगार के अवसर मिलने पर महिलाएं परिवार की आय बढ़ाने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकती हैं।
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