
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बल्देवगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चंद्रपुरा का भ्रमण कर गांव में किए गए विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने चैंबर आधारित अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की उपयोगिता को लेकर ग्रामीणों से संवाद किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस व्यवस्था से खुले नालों की समस्या खत्म हुई है और गांव का वातावरण स्वच्छ हुआ है। कलेक्टर ने पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का भी जायजा लिया। इसके बाद हरिनगर में बुंदेली संस्कृति को सहेजने के लिए विकसित ‘अथाई’ का निरीक्षण किया।
अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम का लिया फीडबैक
टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने ग्राम पंचायत चंद्रपुरा पहुंचकर गांव में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से गांव में विकसित किए गए चैंबर आधारित अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम की जानकारी ली।
कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर इस व्यवस्था से होने वाले लाभ, इसके संचालन और रखरखाव के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पहले गांव में खुले नालों के कारण गंदगी और जल निकासी की समस्या बनी रहती थी। अंडरग्राउंड ड्रेनेज व्यवस्था बनने के बाद खुले नालों की समस्या समाप्त हुई है। इससे गांव में साफ-सफाई बेहतर हुई और वातावरण भी स्वच्छ हुआ है।
ग्रामीण खुद कर रहे चैंबर की सफाई
चंद्रपुरा के ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम में बनाए गए चैंबरों की सफाई वे जरूरत के अनुसार स्वयं भी कर लेते हैं। इससे व्यवस्था के रखरखाव में ग्रामीणों की भागीदारी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होने से गंदगी से होने वाली बीमारियों में कमी महसूस हुई है। कलेक्टर ने ग्रामीणों से ड्रेनेज सिस्टम के संचालन के दौरान आने वाली समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली और इसके रखरखाव को लेकर आवश्यक सुझाव लिए।
टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों में किए गए अंडरग्राउंड ड्रेनेज के इस तरह के नवाचार को हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने की बात भी सामने आई है। चंद्रपुरा की व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर जल निकासी और स्वच्छता के लिए किए गए प्रयास का उदाहरण है।
पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार का निरीक्षण
गांव में विकास कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्राम पंचायत की ओर से कराए जा रहे पुरानी बावड़ी के जीर्णोद्धार कार्य का भी जायजा लिया।
उन्होंने मौके पर कार्य की प्रगति और गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। साथ ही जल संरक्षण से जुड़े ऐसे प्रयासों को लगातार बढ़ावा देने की बात कही।
कलेक्टर ने गांव में उपलब्ध पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और उनके बेहतर उपयोग की दिशा में किए जा रहे कार्यों को भी महत्वपूर्ण बताया।
हरिनगर की ‘अथाई’ में बुंदेली संस्कृति की झलक
चंद्रपुरा ग्राम पंचायत के भ्रमण के दौरान कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय हरिनगर ग्राम में विकसित की गई ‘अथाई’ देखने भी पहुंचे।
ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों के सार्वजनिक बैठक स्थल को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हुए ‘अथाई’ के रूप में विकसित किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीणों के सामुदायिक स्थल को स्थानीय पहचान से जोड़ना है।
‘अथाई’ की दीवारों पर पुराने और प्रचलित बुंदेली शब्दों को लिखा गया है। इसके जरिए स्थानीय बोली और भाषा को संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। दीवारों पर बनाए गए चित्रों और लेखन के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव का अनुभव कराने की कोशिश की गई है।
बुंदेली रंगोली और लोक चित्रण ने खींचा ध्यान
‘अथाई’ में बुंदेली संस्कृति से जुड़े कई प्रतीकों को भी स्थान दिया गया है। यहां बुंदेली रंगोली, लोक चित्रण और बुंदेली वास्तु से जुड़े प्रतीकों का आकर्षक चित्रण किया गया है।
कलेक्टर ने ‘अथाई’ का निरीक्षण करते हुए ग्राम पंचायत की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को ध्यान में रखकर किए गए प्रयास गांव की पहचान को मजबूत करते हैं।
ग्रामीण सहभागिता से गांव को मिल रही नई पहचान
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने चंद्रपुरा ग्राम पंचायत में किए गए विभिन्न विकास कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सहभागिता से किए जाने वाले ऐसे प्रयास गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने के साथ स्थानीय संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से विकास कार्यों के रखरखाव में लगातार सहयोग करने और सामुदायिक सहभागिता बनाए रखने की अपेक्षा की।
इस दौरान तहसीलदार ओपी गुप्ता, जिला पंचायत के जिला समन्वयक मनीष जैन, सरपंच श्रीमती विदेह संजीव पाठक सहित संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
चंद्रपुरा में अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम और हरिनगर की ‘अथाई’ जैसे प्रयास ग्रामीण विकास को स्थानीय जरूरतों और संस्कृति से जोड़ने की दिशा में किए गए नवाचार के रूप में सामने आए हैं।
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