
टीकमगढ़/ धर्मेंद्र सिंह लोधी: ग्राम पंचायतों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान, टीकमगढ़ द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, कुण्डेश्वर में तीन दिवसीय पंचायत सम्मेलन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों, सचिवों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों, जलमित्रों और जलसखियों ने भाग लेकर गांवों के विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
पंचायत प्रतिनिधियों ने साझा किए विकास के अनुभव
सम्मेलन में परियोजना क्षेत्र की नैनवारी, सुन्दरपुर, राधापुर, लार खास, नन्नीटेहरी, बड़माड़ई रिगौरा, बड़माड़ई खास और पातरखेड़ा ग्राम पंचायतों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपनी पंचायतों में किए जा रहे विकास कार्यों, उपलब्धियों और चुनौतियों को साझा किया। प्रतिनिधियों ने बताया कि ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाकर और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर गांवों में कई सकारात्मक बदलाव किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता को पंचायत विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए। पंचायत स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए सामुदायिक प्रयासों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।
पंचायतें ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी
बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के प्रमुख वासुदेव सिंह ने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पंचायत प्रतिनिधियों, सचिवों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों, जलमित्रों और जलसखियों के बीच बेहतर समन्वय से गांवों के विकास को नई गति मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ग्रामीणों को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें अपनी पंचायत के विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाना है। जब ग्रामीण स्वयं जल, स्वच्छता और विकास से जुड़े फैसलों में भागीदारी करेंगे तो योजनाओं का प्रभाव अधिक स्थायी होगा।
सरपंचों ने बताया, कैसे बदल रहा गांव
सम्मेलन में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने अपने अनुभव साझा किए। ग्राम पंचायत राधापुर के सरपंच मान सिंह लोधी ने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की सफलता के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, सचिवों और ग्रामीणों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अलग-अलग पंचायतों के प्रतिनिधियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।
वहीं ग्राम पंचायत लारखास के सरपंच राहुल गौतम ने जल संरक्षण और स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि केवल पंचायत के प्रयासों से स्थायी बदलाव संभव नहीं है। इसमें ग्रामीणों के साथ जलमित्र, जलसखी और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
कृषि योजनाओं और आधुनिक तकनीक की जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ. आरके प्रजापति ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने जल के सदुपयोग, स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और किसानों के लिए उपयोगी कृषि गतिविधियों के बारे में बताया।
कृषि विभाग के केपी अहिरवार एवं ग्राम सेवक श्री पस्तोर ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को योजनाओं की पात्रता, मिलने वाले लाभ और आवेदन प्रक्रिया से अवगत कराया। अधिकारियों ने किसानों से शासन की कृषि योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।
जल संरक्षण और स्वच्छता पर जोर
राधापुर के जलमित्र राकेश लोधी ने बताया कि गांवों में जल संरक्षण, जल गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को सुरक्षित रखने और पानी के उचित उपयोग के लिए ग्रामीणों की भागीदारी सबसे अहम है।
लार खास ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्य हीरालाल मुखिया ने कहा कि समिति के सक्रिय होने से गांव में जल से जुड़ी समस्याओं को स्थानीय स्तर पर चिन्हित किया जा सकता है। इसके बाद संबंधित समस्या के समाधान के लिए सामूहिक रूप से पहल करना आसान होता है। प्रशिक्षण से समिति के सदस्यों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने में भी मदद मिल रही है।
विकास के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प
सम्मेलन के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, पंचायत विकास, कृषि योजनाओं, शासन की कल्याणकारी योजनाओं और जनभागीदारी जैसे विषयों पर जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी चर्चा की कि गांवों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए।
कार्यक्रम के अंत में पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। साथ ही पात्र हितग्राहियों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने और पंचायतों के समग्र विकास के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि जनभागीदारी, जल संरक्षण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों की तस्वीर में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
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