
राकेश दर्दवंशी | उमरिया, 5 अक्टूबर 2026। पाली थाना क्षेत्र के ग्राम गिठौरी में बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड से जुड़े अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विवाद के बाद आदिवासी महिला-पुरुषों ने करीब 13 घंटे तक थाने के बाहर आंदोलन किया। ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाली-गलौज, अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस के आश्वासन और संबंधित महिला का अस्पताल में मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) कराए जाने के बाद देर रात आंदोलन समाप्त हुआ। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग अभी पूरी नहीं हुई है।
विवाद के बाद थाने के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीण
जानकारी के अनुसार, गिठौरी क्षेत्र में बजरंग पावर इस्पात लिमिटेड से जुड़ी कोयला खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों और कंपनी से जुड़े लोगों के बीच विवाद की स्थिति बनी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, भूमि को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की बात भी ग्रामीणों की शिकायत में कही गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी बीच कंपनी से जुड़े कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत में कुछ कंपनी कर्मचारियों के नाम भी दिए गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई तथा मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं भी हुईं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
इसके बाद आदिवासी महिला और पुरुष पाली थाना परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों की मांग थी कि शिकायत की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। मामले को लेकर पुलिस की ओर से दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
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महिला का कराया गया एमएलसी, आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म
ग्रामीणों का आंदोलन सुबह करीब 11 बजे शुरू होकर रात लगभग 12 बजे तक चला। करीब 13 घंटे तक महिला और पुरुष थाने के बाहर डटे रहे। आंदोलन के दौरान पुलिस ने संबंधित महिला को अस्पताल भेजकर उसका मेडिकल लीगल केस कराया।
इसके बाद पुलिस की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर देर रात आंदोलन समाप्त कर दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं होने से वे संतुष्ट नहीं हैं।
मामले में कंपनी पक्ष की ओर से भी ग्रामीणों पर कर्मचारियों के साथ मारपीट और धमकी के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर कुछ धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू किए जाने की जानकारी दी है। ऐसे में पूरे विवाद में दोनों पक्षों के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कांग्रेस नेताओं ने भी ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कंपनी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल पुलिस जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर है।
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