पुराना ठग, नया पैंतरा: ICICI बैंक घोटाले के आरोपी सुखनंदन को GNS मोतीलाल ओसवाल फ्रॉड में किसकी मिली ‘सफेदपोश सिंडिकेट’ की सरपरस्ती?

पुराना ठग, नया पैंतरा: ICICI बैंक घोटाले के आरोपी सुखनंदन को GNS मोतीलाल ओसवाल फ्रॉड में किसकी मिली ‘सफेदपोश सिंडिकेट’ की सरपरस्ती?

 

 

​420 के दर्ज मुकदमे के बावजूद नगर पालिका उपाध्यक्ष हनुमान खंडेलवाल की ही इमारत में खुली महाठगी की दुकान; सत्ता-प्रशासन की आपराधिक खामोशी पर उठे तीखे सवाल

 

*रिपोर्टर :- *जियाउद्दीन अंसारी* 

संभागीय ब्यूरो चीफ शहडोल(म. प्र.)

जन सरोवर प्राइम पत्रिका*

 

 

 

 

 *शहडोल* ​बुढ़ार / धनपुरी  इलाके में गरीब जनता के खून-पसीने की कमाई पर डाका डालने वाले गिरोहों और उनके आकाओं का पर्दाफाश होते ही बुढ़ार से लेकर धनपुरी तक के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। ICICI बैंक के नाम पर दर्जनों बेबस मजदूरों, महिलाओं और सीधे-सादे ग्रामीणों की जिंदगी भर की जमापूंजी डकारने वाला कुख्यात ‘नटवरलाल’ सुखनंदन यादव (निवासी बुढ़ार) एक बार फिर शहर के बीचों-बीच GNS मोतीलाल ओसवाल के नाम पर महाठगी का नया जाल बिछाकर सामने आया है।

​लेकिन इस पूरे काले कारोबार का सबसे वीभत्स और यक्ष प्रश्न यह है कि जिस सुखनंदन पर संगीन धाराओं में पुलिस केस दर्ज हो, जो सलाखों के पीछे होना चाहिए था, वह खुलेआम शहर के सबसे प्राइम लोकेशन पर फर्जीवाड़े का नया साम्राज्य खड़ा करने की जुर्रत कैसे कर बैठा? इस महाठग की पीठ पर आखिर किस रसूखदार ‘सफेदपोश आका’ का हाथ था?

​नगर पालिका उपाध्यक्ष की इमारत बनी ठगी का अड्डा, उठ रहे गंभीर आरोप

​स्थानीय सूत्रों और उजागर हुए पुख्ता तथ्यों ने इस पूरे फर्जीवाड़े में सत्ता और रसूख के गठजोड़ की पोल खोलकर रख दी है। सुखनंदन यादव को GNS मोतीलाल ओसवाल का मायाजाल फैलाने के लिए जो अड्डा मुहैया कराया गया, वह शहर के बीचों-बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के ठीक ऊपर संचालित हो रहा था।

​सब जानते हैं कि जिस इमारत में बैंक ऑफ बड़ौदा चल रहा है और जिसके ऊपर GNS मोतीलाल ओसवाल का दफ्तर सजाकर जनता को लूटा जा रहा था, उस पूरी आलीशान इमारत के मालिक खुद नगर पालिका उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद खंडेलवाल हैं।

​अब इलाके की पीड़ित जनता और जागरूक नागरिक हुक्मरानों से सीधे और तीखे सवाल पूछ रहे हैं:

​क्या रसूख की आड़ में जानबूझकर आंखें मूंदी गईं? जब सुखनंदन यादव पर ICICI बैंक एजेंट बनकर लाखों रुपये डकारने की एफआईआर धनपुरी थाने में पहले से दर्ज थी, तो नगर पालिका उपाध्यक्ष ने किस लालच या दवाब में आकर इस दागी ठग को अपनी ही इमारत में कार्यालय खोलने का मंच दिया?

​प्रशासनिक वेरिफिकेशन को कचरे के डिब्बे में किसने फेंका? किसी भी व्यापारिक दफ्तर या किराएदार को पनाह देने से पहले अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन (Verification) की धज्जियां क्यों उड़ाई गईं? क्या रसूखदारों के लिए कानून के नियम अलग हैं?

​सिंडिकेट का हिस्सा या सिर्फ सरपरस्ती? एक घोटाले से बचकर सुखनंदन का तुरंत दूसरा बड़ा महाफ्रॉड रच देना इस बात का साफ सबूत है कि इस ठग के पीछे स्थानीय सफेदपोशों, राजनीतिक आकाओं और प्रशासनिक शह का पूरा का पूरा ‘सिंडिकेट’ ढाल बनकर खड़ा था!

​ICICI बैंक घोटाले से GNS मोतीलाल ओसवाल फ्रॉड तक का घिनौना सच

​गौरतलब है कि पूर्व में भी सुखनंदन यादव और उसके गुर्गों (कमलाकांत आदि) ने खुद को ICICI बैंक का फर्जी नुमाइंदा बताकर इलाके के अनपढ़ मजदूरों और ग्रामीणों को FD व बचत का झांसा देकर लाखों रुपये की चपत लगाई थी। जब पीड़ितों का गुस्सा फूटा, तब कहीं जाकर धनपुरी थाने में धारा 420, 409, 120B जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में केस दर्ज हुआ था।

​लेकिन कानून के शिकंजे से बचते-बचाते सुखनंदन ने बुढ़ार के मुख्य बाजार को ही अपनी नई ‘शिकारगाह’ बनाया और GNS मोतीलाल ओसवाल के नाम पर जनता को दोबारा लूटने का चक्रव्यूह रच दिया। आज जब इस फ्रॉड की परतें उधड़ रही हैं, तो उंगलियां सीधे उन ताकतवर चेहरों पर उठ रही हैं जिन्होंने इस महाठग को शहर के बीचों-बीच दफ्तर सौंपकर शरीफ बनने का नकाब पहनाया था।

​जनता का आक्रोश: अब मोहरों पर नहीं, आकाओं पर हो सीधी स्ट्राइक!

​ठगी का शिकार हुई बेबस जनता और आक्रोशित नागरिकों का साफ़ कहना है कि पुलिस और जांच एजेंसियां अब सिर्फ सुखनंदन जैसे मोहरों की गिरफ्तारी तक सीमित रहकर खानापूर्ति न करें। जांच की आंच उन ‘सफेदपोश आकाओं’ तक पहुंचनी ही चाहिए, जिन्होंने इस अपराध को सींचा है:

​नगर पालिका उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद खंडेलवाल द्वारा एक नामजद 420 के आरोपी को अपनी ही इमारत में दफ्तर देने के पीछे की असल डील की परतें खोली जाएं!

​बिना पुलिस वेरिफिकेशन के इतने बड़े वित्तीय जालसाज को शरण देने के मामले में जवाबदेही तय की जाए!

​इस पूरे फर्जीवाड़े में पर्दे के पीछे से मलाई काटने वाले हर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूखदार पर सह-अभियुक्त (Co-accused) के तहत मामला दर्ज किया जाए!

​जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि महाठग और उसको संरक्षण देने वाले पूरे ‘सिंडिकेट’ पर पुलिस प्रशासन की सीधी और कठोरतम कानूनी कार्रवाई देखना चाहती है!

  • पुराना ठग, नया पैंतरा: ICICI बैंक घोटाले के आरोपी सुखनंदन को GNS मोतीलाल ओसवाल फ्रॉड में किसकी मिली 'सफेदपोश सिंडिकेट' की सरपरस्ती?
  • MAHENDRA SINGH LAHARIYA

    MAHENDRA SINGH LAHARIYA

    Related Posts

    *अपराध की दुनिया मे रचा नया इतिहास, देता रहा अपराधो को अंजाम, ना देखा कभी थाने का दरवाजा*

    *अपराध की दुनिया मे रचा नया इतिहास, देता रहा…

    आगे पढ़ें
    कोलारस पुलिस ने 7 दुकानों में हुई चोरी का किया खुलासा, एक आरोपी गिरफ्तार

    कोलारस पुलिस ने 7 दुकानों में हुई चोरी का…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले: फास्ट ट्रैक कोर्ट, ₹7 हजार करोड़ निवेश समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

    एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले: फास्ट ट्रैक कोर्ट, ₹7 हजार करोड़ निवेश समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

    भोपाल कूच पर अड़े किसान, आज CM हाउस घेराव की तैयारी; मूंग की 100% खरीदी की मांग

    भोपाल कूच पर अड़े किसान, आज CM हाउस घेराव की तैयारी; मूंग की 100% खरीदी की मांग

    इंदौर नगर निगम में एक के बाद एक घोटाले उजागर, ₹103 करोड़ फर्जी बिल मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, वेतन घोटाले की जांच शुरू

    इंदौर नगर निगम में एक के बाद एक घोटाले उजागर, ₹103 करोड़ फर्जी बिल मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, वेतन घोटाले की जांच शुरू

    कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव, फिर भी PM मोदी ने नंदन नीलेकणि पर क्यों जताया भरोसा? जानिए 5 बड़ी बातें

    कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव, फिर भी PM मोदी ने नंदन नीलेकणि पर क्यों जताया भरोसा? जानिए 5 बड़ी बातें

    CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया RHA, 35 लाख फॉलोअर्स के साथ E20 जनता पार्टी भी चर्चा में

    CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया RHA, 35 लाख फॉलोअर्स के साथ E20 जनता पार्टी भी चर्चा में