
ब्रांडवाणी डेस्क: नर्मदा किनारे विकास की इबारत लिखने वाले एक सेवानिवृत्त इंजीनियर इन दिनों अपनी कार्यशैली के लिए नहीं, बल्कि अपनी ‘अथाह संपत्ति’ के प्रदर्शन को लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। ताजा मामला उनके सुपुत्र के भविष्य को संवारने के नाम पर किए गए 16 करोड़ रुपये के भारी-भरकम शेयर निवेश का है, जिसने केंद्रीय जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
पसीने की कमाई या पद का रसूख? – मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित इंजीनियर साहब एक महत्वपूर्ण प्राधिकरण से रिटायर हुए हैं। सरकारी सेवा के दौरान जो ‘मेहनत’ उन्होंने की, उसका फल अब शहर के पॉश इलाके में बनी एक आलीशान कोठी और शेयर बाजार में करोड़ों के दांव के रूप में दिखाई दे रहा है। मंत्रालय के गलियारों में यह चर्चा आम है कि एक सरकारी वेतनभोगी अधिकारी के पास रिटायरमेंट के तुरंत बाद इतनी बड़ी नकदी और निवेश की क्षमता आखिर आई कहां से?
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जांच एजेंसियों की ‘पैनी नजर’ – खबर है कि साहब का यह आत्मविश्वास ही उनके लिए गले की हड्डी बन सकता है। एक तरफ जहां वे खुलेआम अपनी ‘इन्वेस्टमेंट स्टोरी’ सुना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक केंद्रीय एजेंसी उनकी आय के ज्ञात स्रोतों और इस निवेश के बीच के अंतर को खंगालने में जुट गई है।
“साहब भले ही कागजों पर रिटायर हो गए हों, लेकिन उनकी दौलत की रफ्तार अब भी ‘वर्किंग मोड’ में है। देखना दिलचस्प होगा कि यह निवेश सुपुत्र का भविष्य बनाता है या खुद साहब की पुरानी फाइलों को फिर से खुलवा देता है।”
लोक सेवा से विदा लेने के बाद इस तरह का भव्य प्रदर्शन अक्सर जांच का न्योता होता है। फिलहाल, गलियारों में चर्चा गरम है—साहब रिटायर हुए हैं, उनका रसूख नहीं!
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