
ब्रांडवाणी डेस्क: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल भुगतान प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की घोषणा की है। एक नए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 10 अप्रैल से देशभर के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब सभी वाहनों को FASTag या UPI के माध्यम से ही टोल का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
कैशलेस व्यवस्था का विस्तार
नई व्यवस्था के तहत, FASTag टोल भुगतान का मुख्य माध्यम रहेगा। जिन वाहनों में वैध FASTag नहीं होगा, उनके लिए UPI को बैकअप विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। FASTag या UPI से भुगतान की सुविधा न होने पर, वाहन चालक को ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था करनी होगी, जो 72 घंटे के भीतर पूरी करनी आवश्यक है।
प्रभावित होंगे 1,150 टोल प्लाजा
इस निर्णय के तहत, देशभर के लगभग 1,150 टोल प्लाजा इस नई कैशलेस व्यवस्था में शामिल होंगे, जिसमें प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। इस बदलाव से निजी वाहनों के मालिकों, व्यावसायिक वाहन चालकों और परिवहन कंपनियों पर सीधा असर पड़ेगा, जो अब तक कई स्थानों पर नकद भुगतान करते थे।
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सरकार का उद्देश्य और संभावित चुनौतियाँ
सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और यातायात जाम को कम करना है। नकद लेनदेन खत्म होने से टोल वसूली की प्रक्रिया तेज होगी और वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। हालांकि, कुछ यात्रियों ने कमजोर नेटवर्क, निष्क्रिय FASTag और तकनीकी समस्याओं के कारण संभावित देरी को लेकर चिंता भी जताई है।
भुगतान में देरी पर सख्त नियम
यदि वाहन चालक 72 घंटे के भीतर टोल का भुगतान नहीं करता है, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यह बकाया राशि VAHAN प्रणाली में दर्ज कर दी जाएगी और 15 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर वाहन के खिलाफ प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।इस नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुगम और तेज होगी, जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सकेगा।
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