
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था लंबे समय से अधिकारियों की कमी और पदोन्नति प्रक्रिया में देरी की समस्या से जूझ रही है। राज्य के स्वीकृत प्रशासनिक पदों में से लगभग आधे पद खाली पड़े हैं, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य में स्वीकृत 973 प्रशासनिक पदों के मुकाबले केवल 482 अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 491 पद रिक्त हैं। अधिकारियों की कमी के कारण कई जिलों और तहसीलों में एक ही अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।
प्रदेश में करीब 300 तहसीलदार ऐसे हैं जो नियमित पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं होने के कारण उन्हें नायब तहसीलदार या अन्य पदों की अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं। कई जिलों में डिप्टी कलेक्टर के पदों पर भी प्रभार व्यवस्था के सहारे काम चलाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया के कारण प्रशासनिक ढांचे पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। इसका असर राजस्व, भूमि अभिलेख, जनसुनवाई और अन्य प्रशासनिक सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है।
वहीं, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 तक विभिन्न प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों और पदोन्नतियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। कर्मचारियों और अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही रिक्त पदों को भरने तथा पदोन्नति संबंधी लंबित मामलों का समाधान किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक पदों पर पर्याप्त नियुक्तियां और समयबद्ध पदोन्नति व्यवस्था लागू होने से शासन-प्रशासन की कार्यक्षमता में सुधार आएगा और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।








