
मैहर: रमापति गौतम ने जिले की प्रभारी मंत्री राधा सिंह से जिले के गांवों में किए गए भ्रमण और जन समस्याओं के समाधान को लेकर पारदर्शिता की मांग की है। एक जारी प्रेस विज्ञप्ति में, गौतम ने कहा कि मंत्री को खुलासा करना चाहिए कि उन्होंने कितने गांवों का दौरा किया और कितनी बार ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम कर जनचौपाल आयोजित की। गौतम ने आरोप लगाया कि मंत्री की गतिविधियां केवल उद्घाटन और समापन कार्यक्रमों तक सीमित हैं, जबकि गांवों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है।
उन्होंने बताया कि जिले में 70,000 से 80,000 पशु होने के बावजूद कई पशु चिकित्सालयों में डॉक्टर नहीं हैं। अजमाइन, जूरा, धनवाही, इटमा, सभागंज, जरियारी, हरदासपुर, मगरौरा, घुनवारा और करतहा के अस्पताल चिकित्सक विहीन हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में 10 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं, लेकिन केवल दो चिकित्सक कार्यरत हैं। वहीं करीब 60 उप स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 26 ही संचालित हो रहे हैं और कुछ केंद्र वर्षों से अधूरे पड़े हैं।
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गौतम ने जिले में संचालित सीमेंट उद्योगों द्वारा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और श्रमिकों के शोषण की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की राशि को 3000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग भी दोहराई। जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए, गौतम ने पुराने तालाबों, बावड़ियों और मैहर शहर के 24 प्राचीन कुओं के संरक्षण की आवश्यकता जताई।
उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रचार से अधिक जमीनी काम होना चाहिए और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। गौतम के इस बयान ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान हो सके।
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