
मैहर: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की भोपाल पीठ से लेकर मध्य प्रदेश तक जयश्रीगायत्री प्रकरण में स्वायत्त तंत्र की अस्वीकृति पर गंभीर सवाल नीचे दिए गए हैं। लगातार मिल रही जनशिकायतों की अनदेखी के बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होगी। आम आदमी पार्टी के महासचिव आनंद शास्त्री ने कहा कि विभाग अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला तंत्र बन गया है, जहां कार्रवाई तब होती है जब मामला अदालत तक पहुंच जाता है।उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पर्यावरण उत्पादन की करोड़ों रुपये की राशि वर्षों तक उपयोग के अभाव में स्पष्ट रूप से शून्य की कमी को पूरा करती है।
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वहीं प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (CAMPA) के फंड के उपयोग को लेकर भी अपारदर्शिता के संकेत मिले हैं।सबसे हाल की बात यह सामने आई है कि विभाग के पास पिछले पांच वर्षों की सुरक्षा और प्रमाणिक डेटा तक उपलब्ध नहीं है, जिससे मॉनिटरिंग व्यवस्था की कमी सामने आती है।इस सन्दर्भ में उन्होंने मैहर जिले की स्थिति पर भी चिंता जताई।
उनका कहना है कि यहां सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों द्वारा प्रमुखता से मुद्दे उठाए जा रहे हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।आनंद सावंत ने मांग की है कि मैहर जिले से जुड़े सभी व्यापारिक मामलों के उच्चायुक्त और वैज्ञानिक जांच न किए जाएं और दोषी अधिकारियों की प्रयोगशाला तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे ही उद्योग मंडल हो। उन्होंने कहा कि यह पूरा कार्यक्रम प्रयोगशाला का आईना है और यह सवाल खड़ा किया गया है कि अंतिम चरण की प्रस्तुति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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