
हिंडोरिया/दमोह: नगर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक बालव्यास पं. ऋषिकांत गर्ग जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा, “मनुष्य सुख के समय भगवान को भूल जाता है, जबकि दुख आने पर ही उन्हें स्मरण कर पुकारता है।” उन्होंने बताया कि परमात्मा की कृपा सभी पर समान रूप से होती है, किंतु उनके भक्तों पर विशेष अनुकंपा बनी रहती है। सच्चा भक्त विपत्तियों में भी भगवान की कृपा का अनुभव करता है और वही विपत्ति उसके लिए ईश्वर स्मरण का साधन बन जाती है।
कुन्ती माता का अद्भुत उदाहरण
महाराज श्री ने महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि माता कुन्ती ने भगवान श्रीकृष्ण से सदा विपत्तियां बने रहने का वरदान मांगा था, ताकि उनका स्मरण निरंतर बना रहे। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जबकि उनका विस्मरण ही सबसे बड़ी विपत्ति है।
भीष्म पितामह का चरित्र
कथा में भीष्म पितामह के जीवन प्रसंग को विस्तार से बताते हुए कहा गया कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शन करते हुए और विष्णु सहस्रनाम का उच्चारण करते हुए परमपद की प्राप्ति की। यह प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
परीक्षित जन्म से सृष्टि प्रकरण तक
द्वितीय दिवस पर कथा में परीक्षित जन्म, शुकदेव जी के आगमन एवं सृष्टि प्रकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।
भक्ति में सराबोर हुआ वातावरण
पूरे आयोजन स्थल पर भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे, जिससे आयोजन दिव्य और भव्य स्वरूप में संपन्न हुआ।
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