
दमोह/मनोहर शर्मा: जिले के नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने पदभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताओं और कार्यशैली का खुलासा कर दिया है। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उन्होंने अपनी पहली परिचयात्मक बैठक में अधिकारियों को साफ शब्दों में निर्देश दिया कि योजनाओं के आंकड़े नहीं, बल्कि जमीन पर उनका प्रभाव दिखना चाहिए।
कलेक्टर यादव का स्पष्ट दृष्टिकोण
कलेक्टर यादव ने अधिकारियों से कहा, “मेरा लक्ष्य केवल योजनाओं के टारगेट पूरे करना नहीं है, बल्कि हितग्राहियों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार लाना है।”
किसानों को प्राथमिकता
उन्होंने बताया कि जिले में किसानों की समस्याओं का समाधान उनकी पहली प्राथमिकता होगी। इसके लिए राजस्व और कृषि विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके।
पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान
बुंदेलखंड क्षेत्र से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कलेक्टर ने पेयजल संकट और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए।
गरीब और बेरोजगारों के लिए सख्त निर्देश
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धार्मिक स्थलों से कार्य की शुरुआत
पदभार ग्रहण करने के बाद कलेक्टर ने कुंडलपुर और बांदकपुर में दर्शन कर अपने कार्यकाल की शुरुआत की।
सहयोग की अपील
कलेक्टर यादव ने कहा, “मेरा काम करने का तरीका जिम्मेदार सहयोग का रहेगा। दमोह में अभी बहुत काम किया जाना बाकी है, जिसे हम सभी मिलकर मूर्त रूप देंगे।” अंत में उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे जनहित के मुद्दों को आगे बढ़ाएं, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।
अब दमोह में सिर्फ योजनाएं नहीं, बल्कि नतीजे दिखेंगे और प्रशासन की कसौटी होगी आम जनता का बदला हुआ जीवन स्तर।
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