शिक्षा के मंदिर या शोषण के केंद्र? सरस्वती शिशु मंदिरों में संघ के ‘प्रपंच’ का पर्दाफाश

शिक्षा, जिसे समाज का भविष्य गढ़ने वाली सबसे पवित्र इकाई माना जाता है, आज वैचारिक कट्टरता और शोषण की प्रयोगशाला बनती जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिर स्कूलों के नेटवर्क को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्या ये स्कूल वास्तव में शिक्षा दे रहे हैं, या फिर ये संघ के स्वयं-भोग और राजनीतिक विस्तार का एक सुलभ साधन मात्र बनकर रह गए हैं?

सरस्वती शिशु मंदिरों में दी जाने वाली शिक्षा पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि यहां ‘शिक्षण’ से ज्यादा ‘प्रशिक्षण’ पर जोर दिया जाता है। पाठ्यक्रम को इस तरह से तोड़ा-मरोड़ा गया है कि बच्चों के कोमल मस्तिष्क में वैज्ञानिक सोच की जगह एक खास तरह की संकीर्ण विचारधारा भर दी जाए। इतिहास के पन्नों के साथ छेड़छाड़ करके शिक्षा को नर्क बनाने का यह खेल आने वाली पीढ़ियों की तर्कशक्ति को पंगु बना रहा है।

इस पूरे तंत्र की सबसे दुखद कड़ी वे शिक्षक हैं, जिन्हें ‘आचार्य’ का सम्मानजनक संबोधन तो दिया जाता है, लेकिन उनके अधिकारों का बेरहमी से दमन किया जाता है।

* नाममात्र का वेतन: जहां सरकारी और प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय मिलता है, वहीं इन स्कूलों में शिक्षकों को ‘सेवा’ के नाम पर बेहद कम वेतन में खटाया जाता है।

* अतिरिक्त कार्यों का बोझ: शिक्षकों का उपयोग केवल पढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि संघ के कार्यक्रमों की भीड़ जुटाने, फंड इकट्ठा करने और वैचारिक रैलियों के प्रबंधन के लिए किया जाता है।

* भय का माहौल: यदि कोई शिक्षक अपनी आवाज उठाता है, तो उसे ‘अनुशासनहीनता’ या ‘संस्कारहीनता’ का ठप्पा लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। यह शिक्षकों का खुला शोषण नहीं तो और क्या है?

आरोप है कि इन स्कूलों के बुनियादी ढांचे और संसाधनों का उपयोग स्थानीय संघ प्रचारकों और पदाधिकारियों के रहने, बैठकें करने और राजनीतिक बिसात बिछाने के लिए किया जाता है। जनता के पैसे और चंदे से खड़े किए गए ये विद्यालय अब संघ की निजी जागीर की तरह काम कर रहे हैं, जहां छात्रों की सुविधाओं से ज्यादा प्राथमिकता संगठन के विस्तार को दी जाती है।

शिक्षा को मुक्ति का मार्ग कहा गया है, लेकिन जब शिक्षा संस्थान ही किसी खास एजेंडे की पूर्ति का साधन बन जाएं, तो वे समाज के लिए घातक हो जाते हैं। सरस्वती शिशु मंदिरों में जिस तरह से शिक्षकों का शोषण हो रहा है और शिक्षा का राजनीतिकरण किया जा रहा है, वह स्पष्ट रूप से शिक्षा व्यवस्था को रसातल की ओर ले जाने की कोशिश है।

ब्रैंडवाणी समाचार समाज से यह सवाल पूछता है:
क्या हम अपने बच्चों का भविष्य और शिक्षकों का सम्मान एक वैचारिक मशीनरी की भेंट चढ़ने देंगे?

  • shiksha-ke-mandir-ya-shoshan-ke-kendra-saraswati-shishu-mandir-sangh-prapanch-expose
Gaurav Singh

Gaurav Singh

Related Posts

सिंगरौली: फरियादियों से सीधे संवाद, एसपी ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

सिंगरौली: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित…

आगे पढ़ें
रतलाम के ताल में डीजे विवाद बना जानलेवा, 24 घंटे में पुलिस ने किया हत्याकांड का खुलासा

रतलाम:ताल कस्बे में डीजे विवाद के दौरान हुई हत्या…

आगे पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

MPJAP महाघोटाला: 100 करोड़ के भ्रष्टाचार और अपात्र नियुक्ति के घेरे में डॉ. धीरेंद्र पांडेय, नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को बाँटी रेवड़ियाँ

MPJAP महाघोटाला: 100 करोड़ के भ्रष्टाचार और अपात्र नियुक्ति के घेरे में डॉ. धीरेंद्र पांडेय, नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को बाँटी रेवड़ियाँ

ACS मैडम नाराज: सीनियर IPS के कारण सुप्रीम कोर्ट की फटकार

ACS मैडम नाराज: सीनियर IPS के कारण सुप्रीम कोर्ट की फटकार

भाजपा के प्रति विद्रोह या विकास के रोड़े? अमरपाटन के पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल के ‘धरना पॉलिटिक्स’ से डरी मोहन सरकार!

भाजपा के प्रति विद्रोह या विकास के रोड़े? अमरपाटन के पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल के ‘धरना पॉलिटिक्स’ से डरी मोहन सरकार!

गुरुग्राम से नोएडा सिर्फ 15 मिनट में: भारत में Air Taxi सेवा की बड़ी तैयारी

गुरुग्राम से नोएडा सिर्फ 15 मिनट में: भारत में Air Taxi सेवा की बड़ी तैयारी

सोशल मीडिया विवाद पर जर्मन मॉडल ने तोड़ी चुप्पी, विराट कोहली को बताया ‘अनफेयर टारगेट’

सोशल मीडिया विवाद पर जर्मन मॉडल ने तोड़ी चुप्पी, विराट कोहली को बताया ‘अनफेयर टारगेट’