
सागर/मनिष कुमार चौबे : मध्य प्रदेश का सागर शहर अब स्वच्छता के मामले में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है। नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री के कड़े तेवरों और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने शहर में गंदगी फैलाने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है। स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अब निगम ने POS मशीनों का सहारा लिया है, जिससे मौके पर ही चालान की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
POS मशीन से पारदर्शी कार्रवाई
नगर पालिक निगम सागर ने तकनीक का हाथ थामते हुए हर वार्ड में POS मशीनें उपलब्ध करा दी हैं। इस डिजिटल व्यवस्था के दो मुख्य फायदे सामने आ रहे हैं:
1.त्वरित कार्रवाई: कचरा फेंकते या गंदगी फैलाते पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति का तुरंत चालान काटा जा रहा है।
2. पारदर्शिता: डिजिटल रसीद मिलने से जनता में यह विश्वास जगा है कि जुर्माने की राशि सीधे सरकारी खजाने में जा रही है, जिसका उपयोग शहर के विकास कार्यों में होगा।
सिर्फ जुर्माना नहीं, आदत बदलना है मकसद
नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है। आयुक्त का मानना है कि जब तक नियमों का डर और अनुशासन नहीं होगा, तब तक स्वच्छता को संस्कार बनाना चुनौतीपूर्ण है। उनके नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के कारण सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम कचरा फेंकने की घटनाओं में कमी आई है।
जनता का समर्थन और विशेषज्ञों की राय
शहर के जागरूक नागरिक प्रशासन की इस सख्ती की सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहर को सुंदर बनाने के लिए ऐसी कड़ाई अनिवार्य है। हालांकि, चर्चा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिंदु भी सामने आए हैं:
जागरूकता: केवल दंड से सुधार संभव नहीं, जन-भागीदारी और जागरूकता भी आवश्यक है।
संसाधन: नागरिकों ने सुझाव दिया है कि चालान के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, पर्याप्त डस्टबिन की उपलब्धता और नियमित सफाई व्यवस्था को भी और सुदृढ़ किया जाए।
निरंतरता: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सख्ती लगातार बनी रही, तो सागर जल्द ही देश के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में अपनी जगह बना लेगा।
बदल रही है सागर की तस्वीर
आयुक्त राजकुमार खत्री की इस पहल से कई इलाकों में सफाई का स्तर पहले से काफी बेहतर हुआ है। तकनीक और प्रशासनिक दृढ़ता के इस मेल ने सागर को एक ‘स्मार्ट और क्लीन सिटी’ बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में जनता इस अनुशासन को कितनी सहजता से अपनाती है।
हर नागरिक का कर्तव्य
स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन की सख्ती और जनता का सहयोग ही सागर को एक आदर्श शहर बना सकता है।
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