
भोपाल। मध्यप्रदेश भोज (ओपन) विश्वविद्यालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. सुनील मंदरिया को पद से हटाए जाने के बाद उच्च शिक्षा जगत में इस फैसले की व्यापक चर्चा हो रही है। पिछले लंबे समय से ब्रांडवाणी समाचार द्वारा विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं, प्रशासनिक विसंगतियों और विवादित निर्णयों से जुड़े मुद्दों को लगातार प्रमुखता से उठाया जा रहा था। विभिन्न समाचारों और विशेष रिपोर्टों के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए थे, जिसके बाद यह मामला शासन के संज्ञान में पहुंचा।
ब्रांडवाणी समाचार ने अपने कई प्रकाशनों में डॉ. सुनील मंदरिया के कार्यकाल से जुड़े उन मामलों को सामने लाने का प्रयास किया था, जिनमें पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और विश्वविद्यालय के हितों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इन रिपोर्टों के बाद शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हुई। सूत्रों के अनुसार लगातार सामने आ रही शिकायतों और सार्वजनिक विमर्श के बाद शासन स्तर पर भी मामलों की समीक्षा शुरू की गई।
जानकारों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका केवल समाचार प्रसारित करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि जनहित के मुद्दों को शासन और समाज के सामने लाना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। भोज विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में भी ब्रांडवाणी द्वारा लगातार प्रकाशित रिपोर्टों ने जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस को मजबूती प्रदान की। इसके बाद शासन द्वारा लिया गया निर्णय अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
हालांकि डॉ. सुनील मंदरिया के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित जांच और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद ही माना जाएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय में हुए इस प्रशासनिक बदलाव ने लंबे समय से चल रही चर्चाओं को नया आयाम दिया है। वहीं ब्रांडवाणी समाचार इसे जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अपनी पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देख रहा है।
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