
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट्स की बढ़ती लोकप्रियता के साथ साइबर अपराधियों ने भी नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ मामलों में AI प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को फर्जी शॉपिंग लिंक दिखाई देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके पीछे एक तकनीक को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसे “AI पॉइजनिंग” कहा जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है।
AI पॉइजनिंग का अर्थ है कि इंटरनेट पर बड़ी मात्रा में भ्रामक, नकली या छेड़छाड़ की गई जानकारी इस तरह डाली जाए कि AI सिस्टम उसे विश्वसनीय मानकर अपने जवाबों में शामिल करने लगे। यदि किसी नकली ई-कॉमर्स वेबसाइट, फर्जी ऑफर या धोखाधड़ी वाले प्लेटफॉर्म की जानकारी बड़े पैमाने पर ऑनलाइन मौजूद हो, तो कुछ परिस्थितियों में AI मॉडल उसे वैध स्रोत समझकर उपयोगकर्ताओं के सामने प्रस्तुत कर सकता है। इससे लोग अनजाने में फर्जी वेबसाइटों पर पहुंच सकते हैं और आर्थिक नुकसान का शिकार हो सकते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन खरीदारी करते समय केवल AI द्वारा सुझाए गए लिंक पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट का URL, सुरक्षा प्रमाणपत्र (HTTPS), ग्राहक समीक्षाएं और कंपनी की आधिकारिक जानकारी की जांच अवश्य करनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट ही हो। कई फर्जी वेबसाइटें असली ब्रांड्स जैसी दिखती हैं और उपभोक्ताओं को भारी छूट या आकर्षक ऑफर का लालच देकर जाल में फंसाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके खोज रहे हैं। ऐसे में डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा जागरूकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। AI उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी खरीदारी, भुगतान या संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले स्रोत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। तकनीक सुविधा प्रदान करती है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी उपयोगकर्ता की सतर्कता पर ही निर्भर करती है।
- fake-shopping-links-on-chatgpt-ai-poisoning-cyber-security-alert






