
विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर होने वाली पेड़ों की कटाई पर अब लगाम लग सकती है। पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बचाने के उद्देश्य से ‘ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026’ को हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि सड़क, भवन और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं के दौरान पेड़ों को अनावश्यक रूप से काटने की बजाय उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा सके।
नई नीति के अनुसार किसी भी विकास परियोजना में यदि पेड़ों को हटाना अपरिहार्य हो, तो पहले उन्हें ट्रांसलोकेट यानी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। यदि किसी कारणवश पेड़ को काटना आवश्यक हो, तो संबंधित एजेंसी या विभाग को उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। इसके साथ ही लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी ताकि केवल औपचारिक पौधारोपण तक प्रक्रिया सीमित न रह जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण शहरों और कस्बों में हरित क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं। ऐसे में ट्री ट्रांसलोकेशन जैसी नीति पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे पुराने और परिपक्व पेड़ों को बचाने का अवसर मिलेगा, जो वायु गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रित रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने में अहम योगदान देते हैं।
हाईकोर्ट में प्रस्तुत इस नीति को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि इसे अंतिम मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान पर्यावरणीय जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाएगी। पर्यावरणविदों का मानना है कि यह नीति केवल पेड़ों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विकास की प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ और प्रकृति-अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
- tree-translocation-policy-2026-presented-in-high-court-one-tree-cut-20-saplings-mandatory






