
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के दोनों गुटों के बीच टकराव तेज हो गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की महत्वपूर्ण बैठक में केवल तीन सांसदों के पहुंचने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। इस घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद उनके संपर्क में हैं और जल्द ही शिंदे गुट के साथ खुलकर आ सकते हैं। इस दावे ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।
शिंदे गुट का कहना है कि कई सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व और पार्टी की वर्तमान दिशा से संतुष्ट नहीं हैं। पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और यही कारण है कि कुछ सांसद नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि उद्धव गुट ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि शिवसेना (यूबीटी) अभी भी एकजुट है और सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबरें केवल अफवाह हैं।
इस पूरे विवाद के बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ सांसदों को “किडनैप” किया गया है और उन पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। राउत ने दावा किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को प्रभावित करने और उन्हें अपनी पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि शिंदे गुट ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सांसद अपनी इच्छा से निर्णय ले रहे हैं और किसी पर कोई दबाव नहीं है।
लोकसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवसेना के दोनों गुट अपने-अपने संगठनात्मक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में सांसदों की वफादारी को लेकर उठ रहे सवाल महाराष्ट्र की राजनीति को आने वाले दिनों में और अधिक रोचक बना सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों के दल बदलने के दावे सच साबित होते हैं, तो इसका असर केवल शिवसेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य की व्यापक राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों पर भी पड़ सकता है।
- uddhav-thackeray-shiv-sena-meeting-mps-shinde-faction-claim-political-row







