
दुनियाभर में संपन्न लोगों के प्रवासन का रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है और वर्ष 2026 में यह एक नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रहा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष लगभग 1.65 लाख करोड़पति अपने मूल देशों को छोड़कर दूसरे देशों में बसने की योजना बना रहे हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक वेल्थ माइग्रेशन माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कर व्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता, बेहतर निवेश अवसर, जीवन की गुणवत्ता और व्यवसायिक माहौल जैसे कारक अमीर निवेशकों और उद्यमियों के स्थानांतरण के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सिंगापुर इस वैश्विक प्रवासन की सबसे पसंदीदा मंजिलों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। दोनों देशों ने कम कर दरों, निवेश-अनुकूल नीतियों, मजबूत वित्तीय ढांचे और उच्च जीवन स्तर के कारण वैश्विक धनकुबेरों को आकर्षित किया है। विशेष रूप से दुबई और सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों और हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों के लिए प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि इन देशों को दुनिया के सबसे तेजी से उभरते ‘वेल्थ हब’ के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिका से सबसे अधिक करोड़पति दूसरे देशों की ओर पलायन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका अब भी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन बढ़ते कर बोझ, राजनीतिक ध्रुवीकरण और जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसे कारण कुछ संपन्न लोगों को वैकल्पिक गंतव्यों की तलाश के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के कई देश इस अवसर का लाभ उठाकर वैश्विक पूंजी और प्रतिभा को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत की बात करें तो वैश्विक वेल्थ हब इंडेक्स में देश को 56.5 का स्कोर मिला है। भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल परिवर्तन और निवेश के अवसरों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को वैश्विक पूंजी और उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों को अधिक आकर्षित करने के लिए नियामकीय सरलता, बुनियादी ढांचे और निवेश वातावरण में लगातार सुधार जारी रखना होगा। वैश्विक स्तर पर बढ़ता वेल्थ माइग्रेशन आने वाले वर्षों में आर्थिक प्रतिस्पर्धा और निवेश प्रवाह के नए समीकरण तय कर सकता है।
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