
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की रफ्तार फिलहाल थमी हुई है और इसके पीछे एक नहीं बल्कि पांच प्रमुख मौसमीय सिस्टम जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएं सामान्य रूप से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिसके कारण मानसून का विस्तार धीमा पड़ गया है। इसका असर यह हुआ कि देश के 19 राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है और कई इलाकों में लोग अब भी अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत में बने उच्च दबाव क्षेत्र, मानसूनी ट्रफ की कमजोर स्थिति, पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव, समुद्री हवाओं की धीमी गति और वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव जैसे कारकों ने मिलकर मानसून की प्रगति को प्रभावित किया है। सामान्य परिस्थितियों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आने वाली हवाएं मध्य और उत्तर भारत तक पहुंचती हैं, लेकिन वर्तमान में इनका प्रवाह बाधित हो रहा है।
मानसून की इस सुस्ती का असर सबसे ज्यादा कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। किसानों को समय पर बारिश न होने की चिंता सता रही है। वहीं शहरों में भी गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया है।
हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। यदि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं का प्रवाह मजबूत होता है तो कई राज्यों में व्यापक बारिश देखने को मिल सकती है। फिलहाल मौसम वैज्ञानिक लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं और किसानों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी अगले कुछ दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।
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