
भारतीय विमानन क्षेत्र ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार देश में किसी कॉमर्शियल जेट विमान की सफल लैंडिंग स्वदेशी GAGAN (GPS Aided GEO Augmented Navigation) सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम की मदद से कराई गई। इस सफल परीक्षण के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में घने कोहरे, धुंध और खराब विजिबिलिटी जैसी परिस्थितियों में भी विमान अधिक सुरक्षित और सटीक तरीके से लैंडिंग कर सकेंगे। यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष और विमानन तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
GAGAN प्रणाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है। यह सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम विमान को पारंपरिक ग्राउंड-आधारित नेविगेशन सिस्टम की तुलना में अधिक सटीक स्थिति और मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है। इससे पायलटों को रनवे तक पहुंचने में बेहतर सहायता मिलती है, विशेष रूप से तब जब मौसम खराब हो और दृश्यता बेहद कम हो। इस तकनीक से उड़ानों की सुरक्षा बढ़ने के साथ-साथ संचालन की दक्षता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक के व्यापक उपयोग से खराब मौसम के कारण उड़ानों में होने वाली देरी, डायवर्जन और रद्द होने की घटनाओं में कमी आ सकती है। साथ ही छोटे और मध्यम हवाई अड्डों पर भी आधुनिक नेविगेशन सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा, जहां महंगे ग्राउंड-आधारित लैंडिंग सिस्टम स्थापित करना हमेशा संभव नहीं होता। GAGAN प्रणाली विमान को अधिक सटीक ऊंचाई और दिशा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे लैंडिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बन जाती है।
इस सफल ट्रायल के बाद भारत वैश्विक स्तर पर उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी सैटेलाइट आधारित विमानन नेविगेशन प्रणाली उपलब्ध है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तकनीक का उपयोग देश के अधिक हवाई अड्डों पर किया जाएगा। इससे यात्रियों की सुरक्षा, उड़ानों की समयबद्धता और भारतीय विमानन क्षेत्र की तकनीकी क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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