
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने महज ₹400 प्रतिदिन की तनख्वाह पर काम करने वाले युवकों को बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन की ड्यूटी पर लगवाकर परीक्षा प्रणाली को ही कमजोर कर दिया। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर गैंग के सदस्यों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने में मदद की।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने करीब 200 युवकों को बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन से जुड़ी निजी एजेंसियों में नौकरी दिलवाई। परीक्षा के दौरान यही कर्मचारी पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में हेरफेर कर सॉल्वर को वास्तविक उम्मीदवार बताकर परीक्षा हॉल तक पहुंचाते थे। इससे परीक्षा की सबसे अहम सुरक्षा परत को ही निष्प्रभावी कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में दलाल, सॉल्वर, तकनीकी कर्मचारी और कुछ निजी एजेंसियों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रैकेट किन-किन राज्यों में सक्रिय था और कितने परीक्षा केंद्र इसकी जद में आए। मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इस खुलासे के बाद NEET परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा संगठित फर्जीवाड़ा साबित हो सकता है। अब बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया, निजी एजेंसियों की नियुक्ति और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा की जा रही है।
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