नौकरशाही की ‘लालफीताशाही’ में दफन होते मध्य प्रदेश के युवाओं के सपने: ब्रांड्स ग्रुप के चेयरमैन विवेक द्विवेदी का बड़ा बयान

वल्लभ भवन में सिर्फ ‘ऊपर’ के संदेशों और ‘पुराने लेन-देन’ पर होती है सुनवाई? अच्छे प्रोजेक्ट्स को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं अफसर!

भोपाल। मध्य प्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच, राजधानी भोपाल के प्रशासनिक केंद्र वल्लभ भवन (सचिवालय) से एक ऐसी कड़वी हकीकत सामने आ रही है, जो राज्य के विकास और युवाओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ब्रांड्स ग्रुप के चेयरमैन विवेक द्विवेदी ने ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि मंत्रालय में बैठे आला अधिकारी प्रदेश के हित से जुड़े बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को सुनने तक में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर भारी उपेक्षा

विवेक द्विवेदी ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर किया। उन्होंने कहा:

“जब भी कोई उद्यमी या जागरूक नागरिक प्रदेश के विकास और युवाओं के रोजगार से जुड़ा कोई बेहतरीन प्रोजेक्ट लेकर वल्लभ भवन जाता है, तो अधिकारी उसे सुनने से ही इंकार कर देते हैं। अपर मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव (PS) स्तर के आला अधिकारी या तो इन महत्वपूर्ण विषयों को देखना ही नहीं चाहते या फिर उन्हें बेहद हल्के में लेकर नजरअंदाज कर देते हैं।”

उद्यमी द्विवेदी ने व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मंत्रालय के गलियारों में अब केवल दो ही तरह की फाइलों पर फुर्ती दिखाई जाती है—या तो ऊपर से किसी ‘बड़े नाम’ का सीधा संदेश आया हो, या फिर अधिकारियों के उन लोगों से ‘पुराने लेन-देन’ के मजबूत संबंध हों।

लाखों नौकरियों की संभावना वाले प्रोजेक्ट को किया दफन

चेयरमैन विवेक द्विवेदी ने खुलासा किया कि उनके द्वारा एक ऐसा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, जिससे मध्य प्रदेश के लाखों युवाओं को सीधे रोजगार और नौकरियां मिल सकती थीं। इस प्रोजेक्ट से न केवल बेरोजगारी दूर होती, बल्कि प्रदेश के राजस्व और विकास को भी एक नई गति मिलती।

लेकिन, नौकरशाही के अड़ियल रवैये की इंतहा देखिए—10 से 15 बार लगातार प्रयास करने के बावजूद न तो संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव ने इस पर बात करना उचित समझा, और न ही वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल पर बैठे शीर्ष अधिकारियों ने इसे सुनने की जहमत उठाई। क्या लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा प्रोजेक्ट इन अफसरों के लिए सिर्फ एक रद्दी का टुकड़ा है?

बाहरी लोगों पर मेहरबानी, स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी, आखिर क्यों?

ब्रांड्स ग्रुप के चेयरमैन ने मध्य प्रदेश की इस मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को राज्य की सबसे बड़ी ‘विडंबना’ करार दिया है। आजकल शासन-प्रशासन में एक नई और खतरनाक होड़ चल पड़ी है—बाहर के बड़े कॉर्पोरेट्स और लोगों के साथ बिजनेस करने के लिए लाल कालीन बिछाया जाता है, लेकिन राज्य के अपने उद्यमियों के बेहतरीन और जमीनी प्रोजेक्ट्स को जीते जी दफन कर दिया जाता है।

इस पूरी व्यवस्था का सबसे दुखद पहलू यह है कि प्रदेश के मुखिया (मुख्यमंत्री) तक राज्य के विकास से जुड़े ये असली और जनहित के प्रोजेक्ट्स पहुँच ही नहीं पाते, क्योंकि बीच में बैठी नौकरशाही की दीवार इन्हें रास्ते में ही रोक देती है।

अच्छे काम और विकास से डरते हैं अफसर?

यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। जो अधिकारी जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाते हैं और जिन पर प्रदेश के विकास की जिम्मेदारी है, वे आखिर नया और अच्छा काम करने से क्यों डर रहे हैं? क्या देश और प्रदेश का विकास इन अधिकारियों की प्राथमिकता में शामिल नहीं है?

अगर लाखों युवाओं को रोजगार देने वाले प्रोजेक्ट्स वल्लभ भवन की फाइलों में इसी तरह दम तोड़ते रहे, तो ‘आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश’ का सपना कैसे पूरा होगा? मुख्यमंत्री को खुद इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए कि आखिर पांचवीं मंजिल और मंत्रालयों के बंद कमरों में प्रदेश के भविष्य के साथ यह कैसा खिलवाड़ हो रहा है।

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gaurav singh rajput

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