पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड: पुलिस के हाथ लगे नए सुराग, कोड वर्ड से रची गई थी पूरी साजिश

पुणे: महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी कथित तौर पर एक-दूसरे से बातचीत के दौरान कुछ खास कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं संकेतों के जरिए हत्या की योजना को अंजाम तक पहुंचाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति भी अदालत से मांग रही है।

पुलिस हिरासत बढ़ाने की तैयारी

शुक्रवार को सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस रिमांड समाप्त हो रही है। ऐसे में लोनावला पुलिस अदालत से दोनों की पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग करेगी। जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी कई अहम पहलुओं की जांच बाकी है और आरोपियों से पूछताछ जारी रखना आवश्यक है। साथ ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए दोनों के बयानों की सच्चाई भी परखी जाएगी।

कोड वर्ड और इशारों से हुई थी साजिश

पुलिस जांच के अनुसार, दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर हत्या के दौरान सीधे बातचीत करने के बजाय पहले से तय किए गए संकेतों और कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी दावा किया गया है कि लोहागढ़ किले पर वारदात से पहले एक तय इशारे के बाद केतन अग्रवाल को खाई में धक्का दिया गया। पुलिस का मानना है कि इससे वारदात पूर्व नियोजित होने के संकेत मिलते हैं।

पहले से की थी रिहर्सल

जांच एजेंसियों का दावा है कि हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी। पुलिस के मुताबिक, पुणे के एक पहाड़ी इलाके में दोनों ने पहले यह अभ्यास किया कि धक्का किस तरह दिया जाएगा ताकि कोई गवाह न रहे और वारदात को दुर्घटना जैसा दिखाया जा सके।

डिजिटल सबूत भी जांच के दायरे में

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी मिटाने की कोशिश की थी। यहां तक कि डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर करने के लिए फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

पुलिस के सामने अभी कई सवाल

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की पूरी साजिश कब बनाई गई, इसमें और कौन-कौन शामिल था तथा क्या इस अपराध की योजना पहले से कई बार बनाई गई थी। पुलिस का कहना है कि अब तक मिले डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य मामले को मजबूत बना रहे हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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  • Manisha Gupta

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