
पिछोर/रानू परिहार की रिपोर्ट: तहसील पिछोर के ग्राम बूढौन में रविवार को बिना प्रशासनिक अनुमति वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की प्रतिमा स्थापित किए जाने का मामला सामने आया है। प्रतिमा स्थापित होने की जानकारी मिलने के बाद गांव में हलचल बढ़ गई और मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। प्रतिमा किसने और कब स्थापित की, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात लोगों ने रात के समय प्रतिमा स्थापित की।
बताया गया है कि पिछोर विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से बिना अनुमति महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। इसी को लेकर पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि सरकारी या विवादित भूमि पर प्रशासन की अनुमति के बिना किसी भी महापुरुष की प्रतिमा स्थापित नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि प्रतिमा स्थापना के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विधायक की चेतावनी के बाद भी बूढौन में प्रतिमा स्थापित किए जाने की घटना सामने आने से प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर वीरांगना रानी अवंती बाई के प्रति सम्मान की भावना है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित किए जाने से कानून-व्यवस्था और भविष्य में भूमि विवाद की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। स्थानीय ग्रामीणों की इस मामले में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी महापुरुष की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है, ताकि बाद में किसी प्रकार का विवाद न हो।
मामले की सूचना राजस्व और पुलिस प्रशासन को दिए जाने की बात सामने आई है। प्रशासन द्वारा प्रतिमा स्थापित किए जाने की परिस्थितियों और इसे स्थापित करने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि, प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि प्रतिमा किसके द्वारा और किस अनुमति के आधार पर स्थापित की गई, इसकी जांच के बाद क्या कदम उठाया जाता है। बूढौन की घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति प्रतिमा स्थापना और उससे जुड़े नियमों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
ये भी पढ़े – महाराज भानु प्रताप सिंह जूदेव का निधन: खनियांधाना रियासत की ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक सफर का हुआ अवसान
- pichhore-rani-avanti-bai-statue-installed-without-permission








