
सागर: पुलिस ने साइबर अपराध और ठगी से जुड़ी रकम के सर्कुलेशन के लिए म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रारंभिक जांच में 16 से अधिक फर्जी फर्मों और उनसे जुड़े बैंक खातों का पता चला है, जिनमें कुल 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य बेरोजगार और सामान्य लोगों को कमीशन तथा आसान कमाई का लालच देकर उनके आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी फर्में तैयार कर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था।
इन खातों के जरिए कथित तौर पर साइबर ठगी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसका सर्कुलेशन किया जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और रकम के पूरे लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। मामले की शुरुआत 13 अगस्त को थाना मकरोनिया में रोहित पिता रूपराज पटेल की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म तैयार की गई और फेडरल बैंक की मकरोनिया शाखा में करंट अकाउंट खुलवाया गया। पुलिस ने बैंक खाते की जांच की तो उसके नाम से ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म का पता चला। प्रारंभिक जांच में फरवरी 2026 से अब तक करीब छह महीने की अवधि में इस खाते से लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन सामने आया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंक खातों के लेन-देन, फर्मों, बैंकिंग चैनल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं।
16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
पुलिस जांच में अब तक 16 से अधिक फर्जी फर्मों का पता चला है। इनसे जुड़े बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस फर्जी फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों को खुलवाने की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन और बैंक खातों के संचालन में किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही। जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही हैं।
पुलिस ने नागरिकों से की अपील
मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कमीशन या आसान कमाई के लालच में किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य बैंकिंग जानकारी उपलब्ध न कराएं। किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से फर्म या बैंक खाता खुलवाकर उसका संचालन किसी और को सौंपना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि किसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी या अन्य अपराध से प्राप्त रकम के लेन-देन में किया जाता है, तो संबंधित खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है। नागरिकों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस को देने और साइबर अपराध के मामलों में सतर्क रहने की अपील की गई है।
ये भी पढ़े – ढाना में संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर क्रमांक-172 का शुभारंभ, 550 एनसीसी कैडेट्स ले रहे प्रशिक्षण
- sagar-independence-day-cultural-competition-children-judicial-staff








