
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी कभी आजम खान के सबसे महत्वाकांक्षी सपनों में गिनी जाती थी। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा संस्थान खड़ा करने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट कुछ ही वर्षों में आजम खान की राजनीतिक और सामाजिक पहचान का अहम हिस्सा बन गया। लेकिन समय के साथ यूनिवर्सिटी जमीन, निर्माण और कानूनी विवादों में घिरती चली गई। अब 38 इमारतों को कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन के चलते हटाने का आदेश और 19 अगस्त 2026 को आजम खान व जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई ने इस संस्थान को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
2003 में शुरू हुआ था सपने का सफर
जौहर यूनिवर्सिटी की कहानी मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से शुरू होती है। आजम खान ने वर्ष 2003 में इस ट्रस्ट की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य रामपुर में ऐसा बड़ा शैक्षणिक संस्थान तैयार करना था, जहां उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध हो सकें।
इसके बाद 2006 में यूनिवर्सिटी की नींव रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यूनिवर्सिटी का शिलान्यास किया। शुरुआती दौर में इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई चुनौतियां भी सामने आईं।
2012 में मिली यूनिवर्सिटी की पहचान
लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2012 जौहर यूनिवर्सिटी के लिए अहम साबित हुआ। इसी साल इसे पूर्ण विश्वविद्यालय के रूप में आगे बढ़ने का रास्ता मिला और 18 सितंबर 2012 को इसका उद्घाटन किया गया।
उद्घाटन कार्यक्रम में मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे। उस समय जौहर यूनिवर्सिटी को रामपुर के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया था।
आजम खान ने इसे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सपनों में शामिल किया था। यूनिवर्सिटी के विस्तार के साथ यहां अलग-अलग विषयों में उच्च शिक्षा की सुविधाएं विकसित की गईं।
शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में बनाई पहचान
समय के साथ यूनिवर्सिटी का कैंपस विस्तारित होता गया। यहां इंजीनियरिंग, कानून, शिक्षा, मानविकी, कृषि और अन्य विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित होने लगे। मेडिकल और अन्य संस्थानों को विकसित करने की योजनाएं भी सामने आईं।
यूनिवर्सिटी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता मिली और इसे अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा भी प्राप्त हुआ।
लेकिन जिस संस्थान को आजम खान अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखते थे, वह धीरे-धीरे विवादों का केंद्र बन गया।
जमीन को लेकर बढ़ा विवाद
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सबसे बड़े विवादों में जमीन का मामला रहा। उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी की जमीन और लीज से जुड़े कई मामलों पर सवाल उठाए। सरकार की कार्रवाई के खिलाफ ट्रस्ट की ओर से कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई।
2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से जुड़ी जमीन की लीज समाप्त किए जाने के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे यूनिवर्सिटी से जुड़े भूमि विवाद को बड़ा कानूनी झटका लगा।
2017 के बाद आजम खान पर बढ़े कानूनी मामले
उत्तर प्रदेश में 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खान के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए। इनमें जमीन, कथित अतिक्रमण, दस्तावेजों और अन्य आरोपों से जुड़े मामले शामिल रहे। इनमें से बड़ी संख्या में मामलों का संबंध जौहर यूनिवर्सिटी से भी जोड़ा गया।
आजम खान और उनके समर्थक कई बार इन कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना रहा है कि सरकारी जमीन और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
2026 में 38 इमारतों पर मंडराया बुलडोजर का खतरा
जुलाई 2026 में जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर बड़े विवाद में आ गई। रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को कथित तौर पर अनधिकृत बताते हुए कार्रवाई का आदेश जारी किया।
प्राधिकरण ने आरोप लगाया कि इन भवनों के निर्माण के लिए जरूरी स्वीकृतियां नहीं ली गई थीं। यूनिवर्सिटी को खुद इन निर्माणों को हटाने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं होने पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
हालांकि बाद में इस आदेश पर अंतरिम रोक लगी, जिससे तत्काल बुलडोजर कार्रवाई टल गई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन अब कानूनी राहत के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा ले रहा है।
छात्रों का भविष्य भी चिंता में
विवाद के बीच यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के सामने भी अनिश्चितता का सवाल खड़ा हुआ। छात्रों और पूर्व छात्रों ने यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन कर इमारतों को गिराने की कार्रवाई रोकने की मांग की।
छात्रों की चिंता है कि यदि बड़े पैमाने पर भवनों को हटाया गया तो उनकी पढ़ाई, परीक्षाओं और भविष्य पर असर पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार कैंपस में करीब 3 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
अब ईडी की कार्रवाई से फिर सुर्खियों में
19 अगस्त 2026 को प्रवर्तन निदेशालय ने आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर समेत दिल्ली के कुल 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच के तहत की गई बताई गई है।
ईडी की कार्रवाई के बाद जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। हालांकि तलाशी के दौरान क्या बरामद हुआ और जांच आगे किस दिशा में बढ़ेगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है।
अर्श से फर्श तक पहुंची कहानी
जिस जौहर यूनिवर्सिटी को आजम खान ने अपने जीवन का सपना बताया था, वह अब कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक विवादों के बीच खड़ी है। एक दौर में जहां यूनिवर्सिटी को शिक्षा और विकास की बड़ी परियोजना के रूप में देखा गया, वहीं आज इसके सामने जमीन, निर्माण और जांच से जुड़े कई सवाल हैं।
फिलहाल 38 इमारतों पर कार्रवाई का मामला कानूनी प्रक्रिया में है और यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं। वहीं ईडी की ताजा कार्रवाई ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अब आने वाले दिनों में अदालतों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई यह तय करेगी कि आजम खान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अपने पुराने स्वरूप में कायम रह पाएगा या फिर इसके भविष्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।
- Jauhar-University-Azam-Khan-Dream-Project-Rise-And-Fall-Timeline








