
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसद से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण एक बच्चे की आंख चली गई और एक बच्ची का कान कट गया।
राहुल गांधी का आरोप: ‘लाठी चलाकर मुकरने वाली सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा’
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, “मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि दिल्ली पुलिस की तारीफ होनी चाहिए। संसद से आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन और कील लगी लाठियां चलाई गईं। एक बच्चे की आंख चली गई और एक बच्ची का कान कट गया, क्या इस बर्बरता की तारीफ होनी चाहिए?” राहुल गांधी ने बताया कि वह खुद अस्पताल जाकर घायल बच्चों से मिले हैं और इस पुलिसिया कार्रवाई के हजारों वीडियो पूरे देश ने देखे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस सरकार का मूल मंत्र ही ‘असत्य और हिंसा’ है, जहाँ पहले बच्चों पर लाठियां चलाई जाती हैं और फिर साफ मुकर जाया जाता है।
अमित शाह और पीएम मोदी पर साधा निशाना
गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि पूरे संसद सत्र के दौरान ‘लापता’ रहे गृह मंत्री विपक्ष का सामना करने से भागते रहे और प्रधानमंत्री ने आज तक पीड़ित छात्रों से माफी नहीं मांगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा वे लोग हैं जिन्हें न तो अपनी गलती दिखाई देती है और दिखने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं करते। उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि देश के युवाओं से झूठ न बोला जाए क्योंकि उनके पास आंखें भी हैं और याददाश्त भी।
किरेन रिजिजू ने किया था दिल्ली पुलिस का बचाव
इससे पहले, जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बयान देते हुए कहा था कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही किसी की हड्डी टूटी है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी प्रदर्शनकारी अस्पताल में भर्ती नहीं है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी, भीम आर्मी, समाजवादी पार्टी और कुछ पेशेवर आंदोलनकारियों ने घुसपैठ कर हिंसा भड़काने की कोशिश की थी।
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन की सराहना करते हुए कहा था कि इतने बड़े प्रदर्शन में एक भी लाठी का इस्तेमाल नहीं किया गया और पुलिस ने केवल तभी बल प्रयोग रोका जब प्रदर्शनकारी जबरन संसद भवन की ओर बढ़ने लगे थे। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा प्रदर्शन कांग्रेस के शासनकाल में हुआ होता तो स्थिति भयावह हो सकती थी।
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