
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: जिले की राजस्थान सीमा से लगे इंदुर्खी गांव के करीब 200 परिवारों के लिए बारिश के चार महीने किसी मुश्किल से कम नहीं हैं। कूनो नदी पर पुल टूटने के बाद गांव का अपने ही जिले से सीधा संपर्क लगभग खत्म हो जाता है। हालात यह हैं कि जिन रिश्तेदारों और गांवों की दूरी सामान्य दिनों में महज 2 से 12 किलोमीटर है, मानसून में वहां पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब 148 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।
पुल टूटा तो अपने ही जिले से कट गया गांव
इंदुर्खी गांव कूनो नदी के पार बसा हुआ है। नदी के दूसरी ओर ग्राम पंचायत खरवाया है, जहां ग्रामीणों के कई जरूरी काम जुड़े हुए हैं। लेकिन बरसात के दौरान कूनो नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों के लिए नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल पहले बाढ़ में पुल ढह जाने के बाद से उनकी परेशानी लगातार बनी हुई है। बारिश के चार महीनों में गांव का सीधा संपर्क शिवपुरी जिले के दूसरे हिस्सों से कट जाता है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में राजस्थान के रास्ते होकर आवागमन करना पड़ता है।
2 से 12 किमी की दूरी अब 148 किमी
इंदुर्खी के ग्रामीणों की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उनके कई रिश्तेदार और आसपास के गांव बेहद कम दूरी पर स्थित हैं। सामान्य परिस्थितियों में जहां 2 से 12 किलोमीटर का सफर तय करके लोग एक-दूसरे के घर पहुंच सकते हैं, वहीं पुल टूटने के कारण बारिश में यही दूरी करीब 148 किलोमीटर हो जाती है।
इसका असर सिर्फ रिश्तेदारी और सामाजिक आवागमन पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों को बाजार, सरकारी कार्यालय, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर
कूनो नदी के उफान पर आने से सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी के उस पार स्थित खरवाया के मिडिल स्कूल तक पहुंचना बारिश के दौरान मुश्किल हो जाता है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावक उन्हें नदी पार भेजने का जोखिम नहीं उठाते।
इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई बच्चों की नियमित स्कूलिंग बाधित हो रही है और अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ रही है।
गांव के छात्र अंश सिंह के मामले ने समस्या की गंभीरता को और सामने ला दिया है। परिजनों के अनुसार, अंश का राजस्थान के देवरी में एडमिशन कराने के लिए टीसी पर हस्ताक्षर करवाने के सिलसिले में वे तीन बार पोहरी बीईओ कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन वहां संबंधित अधिकारी के नहीं मिलने से उनका काम अटका हुआ है।
7.78 करोड़ से बना पुल छह महीने में ढहा
ग्रामीणों की परेशानी इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि जिस पुल से उन्हें स्थायी राहत मिलने की उम्मीद थी, वह निर्माण के कुछ ही समय बाद बाढ़ की चपेट में आ गया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में कूनो नदी पर करीब 7.78 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का निर्माण शुरू हुआ था। इसके बाद 3 अगस्त 2021 को पुल का लोकार्पण किया गया। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, लोकार्पण के महज छह महीने बाद ही बाढ़ में यह पुल ढह गया।
पुल टूटने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही इसका दोबारा निर्माण कराया जाएगा, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है।
12 करोड़ की लागत वाला नया पुल भी धीमी गति से
पुराने पुल के टूटने के बाद अब करीब 12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दूसरे पुल का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। इसके चलते उन्हें अभी भी बरसात के दिनों में वही पुरानी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों की मांग है कि पुल निर्माण में तेजी लाई जाए, ताकि मानसून के दौरान गांव का संपर्क जिले के अन्य हिस्सों से बाधित न हो। उनका कहना है कि यह सिर्फ सड़क या पुल की समस्या नहीं है, बल्कि इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी सीधे प्रभावित हो रही है।
चार महीने की परेशानी, पांच साल से इंतजार
इंदुर्खी के करीब 200 परिवारों के लिए हर साल मानसून चार महीने की बड़ी चुनौती लेकर आता है। पांच साल पहले पुल टूटने के बाद से ग्रामीण स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कूनो नदी पर सुरक्षित और मजबूत पुल ही उनकी परेशानी का स्थायी समाधान बन सकता है।
अब ग्रामीणों की नजर निर्माणाधीन पुल के काम पर टिकी है। सवाल यही है कि नया पुल कब पूरा होगा और इंदुर्खी के लोगों को 2 से 12 किलोमीटर की अपनी वास्तविक दूरी तय करने के लिए 148 किलोमीटर का चक्कर कब खत्म होगा।
- Indurkhi-broken-bridge-increases-distance-by-148-km-Shivpuri








