
सागर/ मनीष कुमार चौबे: मध्य प्रदेश के सागर जिले में मकरोनिया थाना पुलिस और साइबर सेल ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और संगठित साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े अंतरप्रांतीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस कार्रवाई में गिरोह के कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक नकद, करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना, नोट गिनने की मशीन और कई डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी बेरोजगार और आम लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे।
शिकायत के बाद खुला करोड़ों के लेन-देन का राज
मामले का खुलासा 13 अगस्त 2026 को मकरोनिया निवासी रोहित पटेल की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसके दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग कर ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम से फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक में करंट अकाउंट खोला गया।
पुलिस ने जब खाते की जांच की तो महज छह महीने में करीब 90 लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन का पता चला। इसके बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की और मामले को सामान्य बैंकिंग धोखाधड़ी के बजाय संगठित साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़ा पाया।
पूछताछ में सामने आया अंतरप्रांतीय नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर एसपी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में धर्मेंद्र नाहर और सोनू डांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से इस तरह का नेटवर्क चलाना सीखा था।
इसके बाद पुलिस ने भोपाल, खजुराहो और इंदौर से जुड़े लिंक खंगाले। जांच आगे बढ़ने पर मुख्य आरोपियों के रूप में ऋषभ पटेल, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे के नाम सामने आए, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
Telegram ग्रुप से ग्राहकों तक पहुंचता था सट्टे का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी ऋषभ पटेल के पास से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क Telegram ग्रुप के माध्यम से संचालित किया जाता था।
आरोपी ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट के एडमिन के तौर पर काम करता था। ग्राहकों को लिंक और क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे। इसके बाद सट्टेबाजी से जुड़ी रकम अलग-अलग फर्जी फर्मों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती और वहां से रकम निकालकर नकद में बदल दी जाती थी।
20 से ज्यादा फर्जी फर्मों का पता
तकनीकी जांच में पुलिस को अब तक 20 से अधिक प्रमुख फर्जी फर्मों और उनके बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस और महाकाल ट्रेडर्स सहित कई नाम शामिल हैं।
इन खातों के शुरुआती विश्लेषण में पुलिस को 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस अब बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की विस्तृत जांच कर रही है, जिससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और रकम के स्रोत का पता लगाया जा सके।
बैंक अधिकारियों और फर्म रजिस्ट्रेशन की भी जांच
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के फर्जी फर्मों का पंजीयन कैसे हुआ और इनके नाम पर बैंकों में करंट अकाउंट किस प्रक्रिया के तहत खोले गए।
जांच में यदि किसी बैंक कर्मचारी, फर्म पंजीयन से जुड़े अधिकारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय और डिजिटल कनेक्शन को खंगालने में जुटी है।
पुलिस ने लोगों को किया सावधान
सागर पुलिस ने आम नागरिकों को साइबर अपराधियों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी व्यक्ति के बहकावे या कमीशन के लालच में आकर आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम, पासबुक, ओटीपी या अन्य बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
पुलिस ने विशेष रूप से चेताया है कि अपने नाम से किसी दूसरे व्यक्ति को फर्म या बैंक खाता संचालित करने देना भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में खाताधारक भी साइबर अपराध की जांच के दायरे में आ सकता है। पुलिस की यह कार्रवाई ऑनलाइन सट्टेबाजी और म्यूल अकाउंट के जरिए चल रहे साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
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