WWF की मीडिया कार्यशाला पर उठे सवाल, पत्रकारों के चयन और पारदर्शिता पर मांगा जवाब

उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: बांधवगढ़ में WWF India के Central India Landscape की ओर से 23 अगस्त को आयोजित मीडिया कार्यशाला को लेकर पत्रकारों के आमंत्रण और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य बांधवगढ़ के परिदृश्य, वन्यजीव संरक्षण, क्षेत्रीय मुद्दों और हालिया घटनाक्रमों को लेकर मीडिया तथा संरक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संवाद स्थापित करना बताया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर लंबे समय से वन्यजीव और बांधवगढ़ से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों की भागीदारी को लेकर अब चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

मीडिया प्रतिनिधियों के चयन का आधार क्या रहा?

कार्यशाला के आयोजकों की ओर से जारी आमंत्रण में मीडिया से जुड़े पेशेवरों को कार्यक्रम में शामिल किए जाने की बात कही गई थी। ऐसे में स्थानीय पत्रकारों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधियों के चयन के लिए आखिर कौन से मापदंड तय किए गए थे।

बांधवगढ़ जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र में स्थानीय मीडिया की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। यहां काम करने वाले पत्रकार लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगल से जुड़े स्थानीय मुद्दों, पर्यटन, प्रशासनिक गतिविधियों और क्षेत्र में होने वाली घटनाओं की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

ऐसे में यदि किसी मीडिया कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र से जुड़े विषयों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है, तो स्थानीय स्तर पर सक्रिय पत्रकारों के प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है।

वरिष्ठ और स्थानीय पत्रकारों की भागीदारी पर सवाल

कार्यशाला को लेकर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या स्थानीय मीडिया संस्थानों और क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय वरिष्ठ पत्रकारों को आमंत्रित करने के लिए कोई निर्धारित सूची या चयन मानदंड बनाया गया था।

यदि आयोजकों ने प्रतिभागियों के चयन के लिए कोई प्रक्रिया तय की थी तो उसे सार्वजनिक किए जाने से इस संबंध में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधियों के चयन के दौरान किन बातों को प्राथमिकता दी गई।

पत्रकारों के बीच उठ रहे सवाल को किसी व्यक्ति विशेष के आमंत्रण या अनामंत्रण से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। मूल सवाल यह है कि ऐसी कार्यशाला में मीडिया प्रतिनिधित्व के लिए पारदर्शी और स्पष्ट प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।

बांधवगढ़ में स्थानीय मीडिया की भूमिका अहम

बांधवगढ़ क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां वन्यजीवों से जुड़े मामलों के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीणों की समस्याएं, जंगल से जुड़े प्रशासनिक फैसले और पर्यटन गतिविधियां भी स्थानीय पत्रकारिता के महत्वपूर्ण विषय रहे हैं।

स्थानीय पत्रकारों को क्षेत्र की जमीनी परिस्थितियों की जानकारी होने के कारण उनकी रिपोर्टिंग में स्थानीय समस्याओं और घटनाओं का पक्ष सामने आता है। ऐसे में संरक्षण से जुड़े संवाद कार्यक्रमों में स्थानीय मीडिया की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

यही वजह है कि कार्यशाला के प्रतिभागियों के चयन को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोजकों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने की अपेक्षा की जा रही है।

अनुदान और सामग्री को लेकर भी उठे आरोप, जांच की मांग

कार्यशाला को लेकर सामने आई आपत्तियों में कुछ लोगों ने संस्था की गतिविधियों, अनुदान और सामग्रियों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में किसी भी प्रकार के अनुदान या सामग्री के कथित दुरुपयोग को तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। यदि इस संबंध में कोई ठोस शिकायत, दस्तावेज या वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध है तो संबंधित एजेंसी अथवा संस्था से उसका सत्यापन कराया जाना जरूरी होगा।

यदि संस्था को किसी प्रकार का सरकारी या अन्य अनुदान प्राप्त होता है, तो उसके उपयोग, खर्च और संबंधित गतिविधियों की जानकारी निर्धारित नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे आरोपों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

आयोजकों से जवाब की उम्मीद

मीडिया कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य यदि वन्यजीव संरक्षण और मीडिया के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है, तो आयोजन से जुड़े सभी पहलुओं में पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो जाती है। खासतौर पर प्रतिभागियों के चयन का आधार, आमंत्रण की प्रक्रिया और कार्यक्रम के उद्देश्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक किए जाने से कई सवालों का समाधान हो सकता है।

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि यदि चयन के लिए कोई निर्धारित मापदंड था तो उसे सामने लाया जाना चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि किन कारणों से कुछ मीडिया प्रतिनिधियों को शामिल किया गया और अन्य को नहीं।

सवालों के जवाब मिलने का इंतजार

WWF-India की ओर से आयोजित बताई जा रही इस कार्यशाला को लेकर फिलहाल मुख्य सवाल मीडिया प्रतिनिधियों के चयन और आयोजन की पारदर्शिता से जुड़े हैं। वहीं अनुदान और सामग्री के कथित बंदरबांट से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज और संबंधित पक्ष का जवाब जरूरी है।

अब नजर इस बात पर है कि आयोजक संस्था इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देती है। यदि चयन प्रक्रिया, प्रतिभागियों की सूची और कार्यशाला से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो इससे विवाद और आशंकाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है।

नोट: खबर में उठाए गए आरोपों एवं सवालों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। संबंधित संस्था/आयोजकों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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Manisha Gupta

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