
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ के विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उन्हें मतदान के अधिकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देंगे। वह कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में विद्यार्थियों से संवाद करेंगे और युवाओं को लोकतंत्र में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करेंगे। निर्वाचन आयोग की ओर से हाल के दिनों में शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
विद्यार्थियों को मतदान के अधिकार की दी जाएगी जानकारी
CEC ज्ञानेश कुमार का विद्यार्थियों के साथ प्रस्तावित संवाद ऐसे समय में हो रहा है, जब निर्वाचन आयोग युवा मतदाताओं के बीच चुनावी साक्षरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को मतदान के अधिकार के साथ-साथ मतदाता के रूप में पंजीकरण, मतदान की प्रक्रिया और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी के महत्व के बारे में जानकारी दिए जाने की उम्मीद है।
युवा वर्ग किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। खासकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए चुनावी प्रक्रिया को समझना जरूरी है, ताकि वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल जागरूक और जिम्मेदार तरीके से कर सकें।
चुनावी साक्षरता बढ़ाने पर निर्वाचन आयोग का जोर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इससे पहले भी शैक्षणिक संस्थानों से चुनावी साक्षरता को बढ़ावा देने की अपील कर चुके हैं। 17 अगस्त को पटना में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से युवाओं को भारत की चुनावी व्यवस्था, लोकतांत्रिक मूल्यों, मतदाता पंजीकरण, मतदान और मतगणना की प्रक्रिया से परिचित कराने पर जोर दिया था।
उन्होंने कहा था कि युवाओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर समझ और भरोसा बढ़ाना देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
Electoral Literacy Clubs को भी मिल रहा बढ़ावा
निर्वाचन आयोग की ओर से Electoral Literacy Clubs (ELC) 2.0 पहल भी शुरू की गई है। इसका उद्देश्य स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनावी शिक्षा के लिए नियमित और डिजिटल माध्यम से जुड़े मंच तैयार करना है। इन क्लबों के जरिए विद्यार्थियों को मतदान से संबंधित जानकारी देने के साथ उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है।
इस पहल के तहत विद्यार्थियों को मतदाता पंजीकरण से लेकर मतदान और मतगणना तक चुनाव के अलग-अलग चरणों की जानकारी दी जा सकती है। निर्वाचन आयोग की डिजिटल व्यवस्था ECINet को भी इस अभियान से जोड़े जाने की बात कही गई है।
पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर विशेष फोकस
18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद युवाओं के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना लोकतांत्रिक अधिकार और जिम्मेदारी दोनों से जुड़ा विषय है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले जागरूकता कार्यक्रम पहली बार मतदान करने वाले विद्यार्थियों के लिए खास महत्व रखते हैं।
लखनऊ में CEC का विद्यार्थियों से संवाद भी इसी व्यापक उद्देश्य से जुड़ा माना जा रहा है। कार्यक्रम के जरिए युवाओं को यह समझाने की कोशिश होगी कि उनका वोट केवल चुनाव के दिन इस्तेमाल किया जाने वाला अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम है।
‘Learn Democracy, Lead Democracy’ का संदेश
निर्वाचन आयोग ने Electoral Literacy Clubs 2.0 के लिए “Learn Democracy. Lead Democracy.” टैगलाइन भी जारी की है। इसका उद्देश्य युवाओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया समझने और उसमें सार्थक भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
लखनऊ में विद्यार्थियों के साथ होने वाला संवाद भी युवाओं के बीच इसी सोच को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को चुनावी प्रक्रिया के बारे में सीधे जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका पर होगी चर्चा
युवाओं की चुनावी भागीदारी बढ़ाना निर्वाचन आयोग के लिए लगातार महत्वपूर्ण विषय रहा है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी ऐसे हैं जो शिक्षा पूरी करने के बाद पहली बार मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करते हैं। यदि उन्हें समय रहते मतदान प्रक्रिया और अपने अधिकारों की जानकारी मिलती है, तो वे अधिक जागरूक मतदाता के रूप में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
CEC ज्ञानेश कुमार का विद्यार्थियों के साथ संवाद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में युवाओं को मतदान के महत्व के साथ चुनावी प्रक्रिया को समझने और जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया जाएगा।
लखनऊ के छात्रों के लिए खास मौका
कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ संवाद विद्यार्थियों के लिए खास अवसर होगा। उन्हें देश की चुनावी व्यवस्था के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी से सीधे संवाद करने और मतदान से जुड़े विषयों को समझने का मौका मिलेगा।
निर्वाचन आयोग की ओर से शैक्षणिक संस्थानों को चुनावी साक्षरता का केंद्र बनाने की कोशिशों के बीच लखनऊ का यह कार्यक्रम भी युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका मुख्य संदेश यही होगा कि जागरूक मतदाता ही मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
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