टीकमगढ़: पांच महीने से राशन की पर्ची लेकर भटक रहे हितग्राही, सेल्समैन पर टालमटोल और धमकाने के आरोप

टीकमगढ़।धर्मेंद्र सिंह लोधी| सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन उपलब्ध कराती है, लेकिन टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ विकासखंड के ग्राम पिपरा मढ़ौरी से सामने आए ग्रामीणों के आरोपों ने राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीण हितग्राहियों का आरोप है कि वे पिछले करीब पांच महीनों से राशन की पर्चियां लेकर उचित मूल्य दुकान के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपने हिस्से का राशन नहीं मिला है। हितग्राहियों के मुताबिक, दुकान के सेल्समैन विजय ठाकुर द्वारा राशन देने में लगातार टालमटोल की जा रही है।

पर्ची लेकर दुकान के चक्कर लगा रहे हितग्राही

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार उचित मूल्य दुकान पर राशन लेने पहुंचते हैं, लेकिन हर बार उन्हें कथित तौर पर किसी न किसी वजह से वापस लौटना पड़ता है। पांच महीने बीत जाने के बाद भी राशन नहीं मिलने से गरीब परिवारों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।

कुछ हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि जब वे अपने हक का राशन मांगते हैं तो उन्हें कथित रूप से डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से कई लोग अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों तक जाने से भी हिचकते हैं।

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खाद्य विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पात्र हितग्राहियों को कई महीनों से राशन नहीं मिल रहा है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों ने खाद्य विभाग के अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि उचित मूल्य दुकान के रिकॉर्ड की जांच होने पर पूरे मामले की स्थिति सामने आ सकती है।

स्टॉक और पीओएस रिकॉर्ड की जांच की मांग

हितग्राहियों ने प्रशासन और खाद्य विभाग से पिपरा मढ़ौरी की उचित मूल्य दुकान का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले पांच महीनों के—

  • स्टॉक रजिस्टर
  • वितरण रजिस्टर
  • पीओएस मशीन का रिकॉर्ड
  • ऑनलाइन वितरण विवरण
  • हितग्राहियों की राशन पर्चियां का मिलान कराया जाना चाहिए।

यदि रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण में अंतर सामने आता है तो यह जांच का विषय होगा कि हितग्राहियों के हिस्से का राशन कहां गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

लंबित राशन दिलाने की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही पात्र परिवारों को उनका लंबित राशन उपलब्ध कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

अब देखना होगा कि पांच महीने से राशन के लिए भटक रहे हितग्राहियों की पर्चियां कब उनके हक के राशन में बदलती हैं और जांच के बाद मामले की वास्तविक तस्वीर क्या सामने आती है।

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