
केरल के वायनाड में 1988 में हुई बैंक डकैती के मामले में 76 वर्षीय अब्दुल समद को अदालत ने 13 साल की जेल और 16 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला करीब 38 साल पुराना है। समद को पुलिस ने अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया था और इसके बाद न्यायिक हिरासत में रहते हुए मुकदमा चला। अदालत में करीब 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 166 दस्तावेज बतौर सबूत पेश किए गए।
मामला चार दशक पुरानी बैंक डकैती से जुड़ा
केरल के वायनाड से सामने आया यह मामला करीब चार दशक पुरानी बैंक डकैती से जुड़ा है। नल्लूरनाड सर्विस कोऑपरेटिव बैंक में वर्ष 1988 में हुई डकैती के मामले में अब 76 वर्षीय अब्दुल समद को अदालत ने 13 साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एल. जयवंत ने मंगलवार को समद को दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।
अदालत ने समद पर 16 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि वह जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें 10 महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
छह लोगों के गिरोह ने दिया था वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, बैंक में डकैती 8 जनवरी 1988 की सुबह हुई थी। छह लोगों का गिरोह एक कार से नल्लूरनाड सर्विस कोऑपरेटिव बैंक पहुंचा था। आरोपियों ने बैंक के ताले तोड़े और अंदर घुसकर सेफ अपने कब्जे में ले लिया।
डकैत बैंक से करीब एक किलोग्राम सोने के आभूषण और 5,544 रुपये नकद ले गए थे। वारदात के दौरान बैंक से आने वाली आवाज सुनकर वहां पहुंचे दो लोगों पर लोहे की रॉड से हमला किए जाने की बात भी अभियोजन पक्ष ने कही।
चार आरोपियों को 1993 में मिली थी सजा
इस मामले में समद के अलावा पांच अन्य आरोपी भी नामजद थे। पुलिस ने सुबैर, सुरेश बाबू, अलीकुट्टी और नसीर को गिरफ्तार किया था। इन चारों को 1993 में अदालत ने सजा सुनाई थी।
एक अन्य आरोपी ओ.के. बाबू लंबे समय तक फरार रहा। उसने वर्ष 2017 में अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उसके खिलाफ भी मुकदमा चला और उसे सजा सुनाई गई।
अब्दुल समद लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। पुलिस ने उसे अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया। इसके बाद वह न्यायिक हिरासत में रहा और इसी दौरान उसके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई हुई।
40 से ज्यादा गवाह, 166 दस्तावेज बने सबूत
इतने पुराने मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने बड़ी संख्या में सबूत पेश किए। कोर्ट में करीब 40 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। इसके अलावा अभियोजन ने 166 दस्तावेज भी सबूत के तौर पर पेश किए।
जांच के दौरान जब्त की गई 21 भौतिक वस्तुओं को भी अदालत के सामने पेश किया गया। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान बरामद किए गए चोरी के सोने के आभूषण भी मामले के सबूतों में शामिल रहे।
पहले स्थानीय पुलिस ने की जांच
बैंक डकैती के बाद मामले की शुरुआती जांच तत्कालीन मनंतवाडी पुलिस ने की थी। बाद में जांच जिला सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई। सीबी-सीआईडी की टीम ने मामले की आगे जांच की और आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
पुलिस के अनुसार, इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में कई साल लगे और अलग-अलग समय पर आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अदालत में पेशी होती रही। अब अब्दुल समद को सजा सुनाए जाने के साथ इस पुराने मामले की कानूनी प्रक्रिया में एक और अहम पड़ाव आया है।
38 साल पहले हुई इस डकैती में बैंक से सोना और नकदी लूटे जाने का आरोप था। मामले में शामिल कई आरोपियों को पहले ही सजा मिल चुकी थी, जबकि अब्दुल समद लंबे समय तक फरार रहने के बाद पकड़ा गया। अदालत के ताजा फैसले के बाद 76 वर्षीय समद को 13 साल जेल की सजा भुगतनी होगी।
- 38-year-old-wayanad-bank-robbery-case-76-year-old-abdul-samad-gets-13-years-jail








