
ग्वालियर| रानू परिहार| 3 अक्टूबर 2026: ग्वालियर साइबर क्राइम विंग ने साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन गैम्बलिंग से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह के जरिए हर महीने करीब 5 से 6 करोड़ रुपये का लेन-देन किया जा रहा था। इस हिसाब से सालाना ट्रांजेक्शन करीब 60 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पुलिस ने गिरवाई क्षेत्र में कार्रवाई कर लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड समेत बड़ी संख्या में सामग्री जब्त की है।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में नेटवर्क के तार दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। मामले में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की जांच जारी है।
फ्लैट में लैपटॉप और मोबाइल से चल रहा था काम
पुलिस के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 को साइबर क्राइम विंग को सूचना मिली थी कि गिरवाई क्षेत्र में एक फ्लैट से फर्जी बैंक खातों और ऑनलाइन साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी निरीक्षक अमित शर्मा और साइबर क्राइम विंग प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह कुशवाह के नेतृत्व में टीम ने गिरवाई की माता वाली गली, सांवरिया धाम फेस-1 स्थित मकान पर दबिश दी। पुलिस के मुताबिक ऊपरी मंजिल के एक कमरे में चार युवक लैपटॉप और मोबाइल फोन पर काम करते मिले।
पूछताछ में उनकी पहचान राजा रायकवार (19), नीलेश रावत (20), पंकज पाल (18) और रानू रावत (19) के रूप में हुई। पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप, दो टैबलेट और कई मोबाइल फोन बरामद किए।
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म्यूल बैंक खातों के जरिए होता था लेन-देन
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे Fairplay-1.com नाम की वेबसाइट पर ऑनलाइन गैम्बलिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसों के लेन-देन की निगरानी करते थे। इसके लिए उन्हें कथित तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों को व्हाट्सऐप के जरिए बैंक खातों की जानकारी मिलती थी। इन खातों में ऑनलाइन गेमिंग और कथित साइबर ठगी से जुड़ी रकम आने के बाद वेबसाइट पर ट्रांजेक्शन को स्वीकार करने और उसका हिसाब रखने का काम किया जाता था। पुलिस का दावा है कि कई बैंक खाते दो-तीन दिन के लेन-देन के बाद बंद हो जाते थे।
जांच में उदय चौहान को इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताया गया है, जबकि संजय रावत पर म्यूल बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस ने उदय चौहान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि संजय रावत फिलहाल फरार बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों को कथित तौर पर 20 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था और हर सात दिन में हिसाब किया जाता था। इस दौरान करीब 4 से 5 लाख रुपये साप्ताहिक मुनाफे की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
19 मोबाइल, 17 एटीएम कार्ड और 38 सिम जब्त
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 1 लैपटॉप, 2 टैबलेट, 19 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड, 4 पासबुक, 9 चेकबुक और 38 सिम कार्ड जब्त किए हैं। इन डिजिटल उपकरणों और बैंक खातों की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेशों से संभावित कनेक्शन की जानकारी जुटाई जाएगी।
मामले में क्राइम ब्रांच थाने में अपराध क्रमांक 37/26 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 61(2), पब्लिक गेम्बलिंग एक्ट की धारा 4(ए) और आईटी एक्ट की धारा 66सी, 66डी के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब फरार आरोपी संजय रावत की तलाश के साथ नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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